इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है।
पीड़िता की बहन ने घटना की रात की पूरी कहानी बताई। उनके अनुसार,
शाम 8:30 बजे पीड़िता ने फोन कर बताया था कि घर में किसी बात को लेकर विवाद हो गया है और वह अपनी एक सहेली के घर जा रही है।
रात करीब 12 बजे, जब वह किसी अन्य स्थान पर जाने के लिए सवारी का इंतजार कर रही थी, तभी एक इको वैन उसके पास आकर रुकी। वैन में पहले से ही दो युवक मौजूद थे, जिन्होंने उसे बैठने के लिए कहा।
बहन के अनुसार,
“रात करीब 3:30 बजे मेरी बहन का फोन आया। वह बुरी तरह रो रही थी, ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी। उसकी आवाज सुनते ही हमारा दिल कांप गया।”
परिजन तुरंत बताए गए स्थान पर पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़िता को बेहोशी की हालत में, गंभीर रूप से घायल पाया। उसके चेहरे और सिर पर गहरी चोटें थीं।
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी महिला को वैन में बैठाकर फरीदाबाद–गुरुग्राम रोड की ओर ले गए। महिला ने विरोध किया, लेकिन दोनों युवकों ने उसे काबू में कर लिया।
आरोप है कि:
करीब दो घंटे तक महिला को शहर की सड़कों पर घुमाया गया
इस दौरान चलती वैन में सामूहिक दुष्कर्म किया गया
रात करीब 3 बजे, SGM नगर के पास उसे चलती वैन से सड़क पर फेंक दिया गया
सड़क पर गिरने से महिला के चेहरे और सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिनमें टांके लगाने पड़े।
घायल अवस्था में पीड़िता को पहले फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली रेफर किया गया, हालांकि फिलहाल उसका इलाज फरीदाबाद में ही चल रहा है।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक:
पीड़िता अभी पूरी तरह होश में नहीं आई है
डॉक्टर उसकी हालत को गंभीर लेकिन स्थिर बता रहे हैं
परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने बताया:
“सीसीटीवी फुटेज, रूट मैप और वाहन ट्रैकिंग के आधार पर जांच की गई। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और वारदात में इस्तेमाल की गई इको वैन भी बरामद कर ली गई है।”
पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और केस से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार:
एक साल में 29,670 बलात्कार के मामले दर्ज हुए
29,909 पीड़िताएं सामने आईं
इनमें से 10,703 मामले 2022 से लंबित थे
यह आंकड़े देश में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
फरीदाबाद की यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता और महिलाओं की असुरक्षा का प्रतीक है। चलती गाड़ी में दरिंदगी और फिर सड़क पर फेंक देना मानवता को शर्मसार करता है। सवाल यह है कि कब तक महिलाएं घर से निकलते समय डर के साये में जीती रहेंगी?
न्याय की उम्मीद अब तेज़ और सख्त कार्रवाई पर टिकी है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न दोहराई जाएं।
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