100 mg से ज्यादा निमेसुलाइड पर बैन: केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, हाई डोज से लिवर को खतरा

नई दिल्ली: दर्द और बुखार में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली निमेसुलाइड (Nimesulide) दवा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 100 मिलीग्राम से अधिक डोज वाली सभी ओरल (खाने वाली) निमेसुलाइड दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग और बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है।

यह आदेश 29 दिसंबर से प्रभावी हो गया है। हालांकि, 100 mg या उससे कम डोज वाली दवाएं प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगी और डॉक्टर की सलाह पर उपलब्ध रहेंगी।


क्यों लगाया गया बैन?

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, निमेसुलाइड एक नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है, जो दर्द और बुखार में तेजी से राहत देती है। लेकिन इसकी अधिक मात्रा लेने से लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में इस दवा के सुरक्षित विकल्प पहले से मौजूद हैं, इसलिए हाई डोज वाली निमेसुलाइड को जारी रखने की कोई जरूरत नहीं थी।


दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोर पर असर

सरकारी आदेश के बाद:

  • दवा कंपनियों को 100 mg से ज्यादा डोज वाली निमेसुलाइड का उत्पादन तुरंत बंद करना होगा

  • बाजार में मौजूद ऐसे सभी स्टॉक वापस मंगाने होंगे

  • मेडिकल स्टोर्स को यह दवाएं शेल्फ से हटानी होंगी

आदेश की अवहेलना करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।


दवा बैन से जुड़े अहम सवाल-जवाब

सवाल: सरकार ने क्या बैन किया है?
जवाब: 100 mg से ज्यादा डोज वाली सभी निमेसुलाइड ओरल दवाओं की बिक्री और निर्माण पर रोक।

सवाल: क्या पूरी निमेसुलाइड बैन हो गई है?
जवाब: नहीं, सिर्फ हाई डोज (100 mg से ज्यादा) पर बैन है।

सवाल: मरीजों पर इसका क्या असर होगा?
जवाब: कुछ कंपनियों की लोकप्रिय पेनकिलर दवाएं बाजार से हटेंगी। मरीजों को वैकल्पिक दवाएं दी जाएंगी।

सवाल: पहले से खरीदी गई दवा का क्या करें?
जवाब: 100 mg से ज्यादा डोज वाली दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।

सवाल: अब दर्द–बुखार में कौन-सी दवाएं मिलेंगी?
जवाब: पैरासिटामोल, आइबुप्रोफेन या अन्य सुरक्षित विकल्प डॉक्टर लिख सकते हैं।

सवाल: बच्चों पर इसका क्या असर होगा?
जवाब: बच्चों के लिए निमेसुलाइड पहले से ही प्रतिबंधित है, इसलिए कोई खास बदलाव नहीं।


जानवरों के लिए पहले ही लग चुका है पूरा बैन

गौरतलब है कि 20 फरवरी 2025 को सरकार ने जानवरों के इलाज में निमेसुलाइड के सभी प्रकार के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।
उस बैन का कारण था – वन्यजीवों और पशुओं में गंभीर दुष्प्रभाव, खासकर गिद्धों की मौत से जुड़ा खतरा।


निष्कर्ष:

केंद्र सरकार का यह फैसला दवा सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। हाई डोज वाली निमेसुलाइड से होने वाले लिवर डैमेज के खतरे को देखते हुए सरकार ने समय रहते कदम उठाया है। अब मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर लेने से बचना होगा और सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ना होगा।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

Related News

All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.

BREAKING NEWS
भजनलाल शर्मा का आया एक फोन और सारा काम हो गया... | मुकेश मिश्रा बने इंडियन मीडिया काउंसिल के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष, रतीराम गुर्जर को मिली प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी | उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस-वोटिंग विवाद: TMC बोली BJP ने विपक्षी सांसदों को ₹15-20 करोड़ में खरीदा; भाजपा ने कहा – I.N.D.I.A. गठबंधन में फूट | लाल किले से 'नए भारत' का आगाज: पीएम मोदी देंगे 12वां ऐतिहासिक भाषण, 5000 खास मेहमान बनेंगे गवाह | PM मोदी बोले: पुणे जैसा पटना और मुंबई जैसा मोतिहारी बनेगा, पहली नौकरी पर सरकार देगी ₹15 हजार | प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ, एनटीपीसी निवेश से ऊर्जा क्षेत्र को भी मिलेगी रफ्तार: अमित शाह | राजस्थान में सरकारी नौकरियों का सुनहरा मौका: 50 हजार कर्मचारियों को मिलेगा प्रमोशन, नई भर्तियों में 100% पद बढ़े | नीरव मोदी के भाई निहाल मोदी को अमेरिका में किया गया गिरफ्तार: PNB घोटाले से जुड़े सबूत मिटाने का आरोप, भारत ने की थी प्रत्यर्पण की अपील | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले - भारतीय प्रवासियों ने दुनिया को भारत की संस्कृति और मूल्यों से जोड़े रखा, पूर्वजों की कठिनाइयों ने उम्मीद को नहीं तोड़ा | CM रेखा गुप्ता के बंगले के रेनोवेशन पर बवाल: एसी-टीवी से भरा टेंडर, विपक्ष ने कहा 'मायामहल' |