बांग्लादेश में फिर हिंदू शख्स को भीड़ ने जिंदा जलाया, धारदार हथियारों से हमला; 15 दिन में दूसरी ऐसी घटना

ढाका: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला शरियतपुर जिले से सामने आया है, जहां 50 वर्षीय हिंदू नागरिक खोकोन दास को भीड़ ने बेरहमी से पीटने के बाद जिंदा जला दिया। इस हमले में वे गंभीर रूप से झुलस गए हैं और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

घर लौटते समय भीड़ ने घेरा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, खोकोन दास जब घर लौट रहे थे, तभी कुछ लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया।
पहले उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया, फिर बेरहमी से पीटा गया और इसके बाद आग के हवाले कर दिया गया। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की तलाश की जा रही है, हालांकि अभी तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


15 दिन में दूसरी बार हिंदू को जलाया गया

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब 15 दिन पहले ही बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक को भीड़ द्वारा जलाने का मामला सामने आया था।
18 दिसंबर को मैमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी और बाद में उनके शव को पेड़ पर लटकाकर आग लगा दी गई थी।


ईशनिंदा के झूठे आरोप में हत्या

दीपू चंद्र दास एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे। भीड़ ने उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर हमला किया था।
हालांकि, बाद में जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि जिस सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर यह हिंसा हुई, उसका कोई प्रमाण नहीं मिला

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें देखा गया कि लोग शव को जलते हुए देख रहे थे और वीडियो बना रहे थे।


12 दिन में 3 हिंदुओं की हत्या

बांग्लादेश में 12 दिनों के भीतर तीन हिंदुओं की हत्या की पुष्टि हो चुकी है:

  • 18 दिसंबर: मैमनसिंह में दीपू चंद्र दास की हत्या और शव को जलाया गया

  • 24 दिसंबर: राजबाड़ी जिले के होसेनडांगा गांव में अमृत मंडल (29) की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या

  • 29 दिसंबर: मैमनसिंह जिले की एक कपड़ा फैक्ट्री में बजेंद्र बिस्वास (42) की गोली मारकर हत्या

पुलिस के अनुसार, अमृत मंडल पर जबरन वसूली का आरोप था और उसके खिलाफ पहले से कुछ आपराधिक मामले दर्ज थे। वहीं, बजेंद्र बिस्वास फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड के पद पर कार्यरत थे।


मानवाधिकार संगठनों की बढ़ती चिंता

लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।


निष्कर्ष:

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा न केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती है, बल्कि मानवाधिकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। बार-बार भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि दोषियों पर सख्त और त्वरित कार्रवाई की सख्त जरूरत है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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