जयपुर: राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर गुरुवार को हुई बहस के दौरान सियासी माहौल गर्मा गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री की कार्यशैली, ब्रांडिंग खर्च और मंत्रियों के आचरण पर गंभीर आरोप लगाए।
टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार में काम हो या न हो, लेकिन ब्रांडिंग जमकर की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रील बनाते हैं और इसी ब्रांडिंग के लिए 8 करोड़ रुपये का टेंडर दे रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यूट्यूब चैनल बना रखे हैं, जिन पर सौ लोग भी देखने नहीं आते।
जूली ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें डर था कि कहीं मुख्यमंत्री ही न बदल दिए जाएं, लेकिन विपक्ष चाहता है कि यही मुख्यमंत्री पूरे पांच साल बने रहें। यह टिप्पणी सत्ता पक्ष पर राजनीतिक तंज के तौर पर देखी गई।
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि देश के एक बड़े उद्योगपति मुख्यमंत्री से मिलकर गए और अगले ही दिन कैबिनेट बैठक बुला ली गई। उन्होंने कहा कि वे चाहें तो उस उद्योगपति का नाम भी बता सकते हैं।
जूली ने यह भी कहा कि विधायक दल की बैठक में ही एक मंत्री ने सरकार की हकीकत उजागर कर दी, जहां यह कहा गया कि एक मंत्री की वजह से लोग गांवों में सरकार के विधायकों को घुसने नहीं देंगे।
जूली ने वंदे मातरम को लेकर भी भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के समय आरएसएस ने वंदे मातरम और तिरंगे को नहीं अपनाया। उन्होंने भाजपा विधायकों से सवाल किया कि वंदे मातरम का कौन सा हिस्सा हटाया गया था, जिस पर विवाद हुआ। जूली ने कहा कि वे बैठ जाते हैं, कोई बता दे, लेकिन इस दौरान कोई विधायक खड़ा नहीं हुआ।
बहस के दौरान जयपुर पुलिस कमिश्नरेट को लेकर भी सदन में हंगामा हुआ। भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम ने ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर कांग्रेस पर आरोप लगाए, जिस पर कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने पलटवार करते हुए कहा कि पुलिस कमिश्नरेट भाजपा सरकार के समय ही बना था।
शून्यकाल के दौरान भाजपा विधायक अंशुमन भाटी ने किसानों को कम बिजली और ज्यादा बिल मिलने को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए। वहीं कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने सरकारी भर्तियों में आरक्षण से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा।
सदन की कार्यवाही के दौरान अफसर गैलरी खाली दिखने पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी नाराज हो गए। उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री को व्यवस्था सुधारने की सख्त हिदायत दी। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि आगे से ऐसी स्थिति नहीं होगी।
राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस सरकार और विपक्ष के बीच तीखे टकराव में बदल गई। टीकाराम जूली के बयानों ने सरकार की ब्रांडिंग, निर्णय प्रक्रिया और मंत्रियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए, वहीं सत्ता पक्ष को भी अपनी ही सरकार के खिलाफ उठे सवालों का सामना करना पड़ा। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर सियासत और तेज होने के संकेत हैं।
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