जयपुर। खींवसर से बीजेपी विधायक रेवंतराम डांगा पर कोष से सिफारिश करने के नाम पर कमीशन मांगने के आरोप में अब अनुशासन समिति स्टिंग ऑपरेशन की भी जांच करेगी। गुरुवार को प्रदेश बीजेपी कार्यालय में प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि मामले को अनुशासन समिति को सौंप दिया गया है, जो इसकी समीक्षा करके वास्तविकता का पता लगाएगी।
मदन राठौड़ ने कहा, “हमने अभी तक जो भी कार्रवाई की है, वह समाचार पत्र की खबर के आधार पर की गई है। समाचार में कितनी सच्चाई थी, कितनी वास्तविकता थी और कितनी कांट-छांट हुई, यह भी अनुशासन समिति जांचेगी। किन शब्दों को छिपाया गया और किन शब्दों को बाहर निकाला गया, कौनसा पक्ष छापा गया और कौनसा नहीं छापा गया, यह सभी तथ्य जांच में सामने आएंगे। मैंने समाचार पत्र पर आरोप नहीं लगाया है। यह पूरी प्रक्रिया न्यायसंगत तरीके से होगी।”
उन्होंने कहा कि खींवसर से विधायक डांगा ने 50 लाख के काम को दिलाने के बदले 40 प्रतिशत कमीशन मांगा था। जबकि BAP विधायक जय कृष्ण पाटीदार ने किसी को ब्लैकमेल करने की नीयत से पैसे मांगे थे। राठौड़ ने स्पष्ट किया कि डांगा का मामला स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ा था, वास्तविक सिफारिश या राशि स्वीकृत नहीं हुई। “यह केवल स्वीकारोक्ति के आधार पर अपराध माना जा सकता है और इसे शुचिता की श्रेणी में रखा गया है। हमारा उद्देश्य किसी को माफ करना नहीं है। इसलिए मामला अनुशासन समिति को सौंपा गया है।”
पूरा मामला करीब 18 दिन पहले सामने आया जब दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में राजस्थान के तीन विधायकों को कैमरे में कैद किया गया। रिपोर्टर ने डमी फर्म का प्रोपराइटर बनकर विकास कार्यों की अनुशंसा के नाम पर 40 प्रतिशत कमीशन मांगते हुए विधायकों से संपर्क किया था। इस ऑपरेशन में डांगा सहित अन्य विधायक भी शामिल पाए गए।
अनुशासन समिति अब इस पूरे मामले में स्टिंग ऑपरेशन की वास्तविकता और रिपोर्ट की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगी, ताकि तय किया जा सके कि कितनी सच्चाई सामने आई और किन पहलुओं में अनुशासन की आवश्यकता है।
निष्कर्ष:
बीजेपी ने विधायक डांगा मामले में निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया अपनाई है। अनुशासन समिति स्टिंग ऑपरेशन सहित सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी, ताकि वास्तविकता सामने आ सके और शुचिता बनाए रखी जा सके।
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