जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ANM) की संविदा भर्ती को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने संविदा भर्ती में न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष तय करने वाले प्रावधान को असंवैधानिक, मनमाना और अवैध करार दिया है।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने 52 पृष्ठों के विस्तृत निर्णय में स्पष्ट कहा कि जब नियमित सरकारी नौकरी के लिए 18 वर्ष की आयु पर्याप्त मानी जाती है, तो संविदा नियुक्ति के लिए 21 वर्ष की शर्त लगाना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।
इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता शोभा पुत्री बाबूराम, निवासी जाटी भांडू, जोधपुर सहित कुल 28 अभ्यर्थियों ने अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर की थीं। सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की गई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता यशपाल खिलेरी व अन्य वकीलों ने पैरवी करते हुए बताया कि सभी अभ्यर्थी 12वीं पास हैं, ANM कोर्स पूर्ण कर चुके हैं और राजस्थान नर्सिंग काउंसिल में विधिवत पंजीकृत हैं। उनकी आयु 18 से 20 वर्ष के बीच है, जिससे वे नियमित भर्ती के लिए पात्र हैं, लेकिन संविदा भर्ती नियमों के कारण उन्हें बाहर कर दिया गया।
कोर्ट के समक्ष यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि—
19 मई 2023 को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने नियमित ANM भर्ती का विज्ञापन जारी किया, जिसमें न्यूनतम आयु 18 वर्ष रखी गई।
वहीं 6 जुलाई 2023 को राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने संविदा भर्ती का विज्ञापन जारी कर न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित कर दी।
कोर्ट ने माना कि एक ही पद, समान योग्यता और समान कार्य के बावजूद नियुक्ति की प्रकृति के आधार पर आयु सीमा में अंतर करना अतार्किक और भेदभावपूर्ण है।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने दलील दी कि संविदा पदों के लिए अधिक परिपक्वता आवश्यक होती है, इसलिए 21 वर्ष की आयु सीमा तर्कसंगत है।
इस पर हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह तर्क “हास्यास्पद और अस्थिर” है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब एक स्थायी कर्मचारी 18 वर्ष की उम्र में जिम्मेदारी निभा सकता है, तो अस्थायी संविदा कर्मचारी के लिए अधिक परिपक्वता कैसे जरूरी हो सकती है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के तहत 18 वर्ष का व्यक्ति विधिक रूप से अनुबंध करने में सक्षम है।
हाईकोर्ट ने पूरे कानून को रद्द करने के बजाय पृथक्करणीयता के सिद्धांत को अपनाया। इसके तहत केवल उसी हिस्से को हटाया गया जो असंवैधानिक था।
अतः राजस्थान सिविल पदों पर संविदा भर्ती नियम-2022 के नियम-6 को केवल उस सीमा तक निरस्त किया गया, जहां न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई थी।
सुनवाई के दौरान 12 जनवरी 2024 को जारी शुद्धिपत्र का मुद्दा भी उठा, जिसमें 1000 अतिरिक्त पद जोड़े गए थे लेकिन आवेदन की प्रक्रिया दोबारा नहीं खोली गई। इससे कई योग्य अभ्यर्थी वंचित रह गए थे। कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर भी असहमति जताई।
हाईकोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए—
नियम-6 आंशिक रूप से रद्द: संविदा ANM भर्ती के लिए 21 वर्ष की आयु सीमा अवैध।
विज्ञापन की शर्तें निरस्त: 6 जुलाई 2023 के विज्ञापन और 12 जनवरी 2024 के शुद्धिपत्र में दी गई 21 वर्ष की शर्त रद्द।
अब 18 वर्ष मान्य: 3058 पदों की भर्ती में न्यूनतम आयु 18 वर्ष मानी जाएगी।
राजस्थान हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से हजारों युवाओं को राहत मिली है, जो केवल आयु सीमा के कारण संविदा ANM भर्ती से बाहर हो गए थे। यह निर्णय न सिर्फ संवैधानिक समानता को मजबूत करता है, बल्कि सरकारी भर्तियों में मनमानी शर्तों पर भी एक सख्त संदेश देता है।
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