24 घंटे से अनशन पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: बोले– प्रण लेता हूं, हर मेले में आऊंगा… फुटपाथ पर रहूंगा

प्रयागराज। माघ मेले के दौरान पालकी (रथ यात्रा) रोके जाने के विरोध में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 24 घंटे से अनशन पर बैठे हैं। पुलिस उन्हें जहां छोड़कर गई थी, वहीं खुले फुटपाथ पर उन्होंने पूरी रात ठंड में बिताई। इस दौरान उन्होंने न तो अन्न ग्रहण किया और न ही पानी पिया।

सोमवार दोपहर शंकराचार्य ने धरना स्थल पर ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन स्वयं आकर इस घटना के लिए माफी नहीं मांगता, तब तक वे अपने आश्रम या शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे और फुटपाथ पर ही रहेंगे।

शंकराचार्य ने कहा कि इतिहास में जब भी शंकराचार्य गंगा स्नान के लिए गए हैं, वे पालकी में ही गए हैं। हर वर्ष इसी परंपरा का पालन होता रहा है, लेकिन इस बार अचानक पालकी को रोके जाने से संत समाज का अपमान हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ पालकी में ले जाए बिना वे गंगा स्नान नहीं करेंगे।

उन्होंने बड़ा संकल्प लेते हुए कहा कि वे प्रयागराज के हर मेले में आएंगे, लेकिन कभी भी शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे। उनका कहना है कि वे वहीं रहेंगे, जहां प्रशासन उन्हें छोड़ेगा और फुटपाथ पर ही अपनी व्यवस्था करेंगे।

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि शंकराचार्य ने रविवार से कुछ भी नहीं खाया है। सुबह की पूजा और दंड तर्पण भी उन्होंने धरना स्थल पर ही किया। अब तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा है।

इस बीच मौनी अमावस्या के दिन रथ यात्रा के दौरान हुए विवाद का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग लगाई थी। इसी दौरान शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद समर्थकों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और आगे बढ़ने की कोशिश की।

शंकराचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि गौ-रक्षा के मुद्दे पर आवाज उठाने के कारण उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने ऐलान किया कि 10 और 11 मार्च को दिल्ली में संत समाज एकजुट होकर शक्ति प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि गौ-माता के लिए शुरू की गई यात्रा जारी रहेगी और अब जहां भी जाएंगे, पालकी उनके साथ ही रहेगी।


निष्कर्ष

माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन अब केवल पालकी विवाद तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह सम्मान, परंपरा और संत समाज के अधिकारों का बड़ा मुद्दा बन गया है। प्रशासन की चुप्पी और संत समाज के सख्त रुख के चलते यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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