प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक चौंकाने वाला और भावनात्मक मामला सामने आया है, जहां 10 साल की शादी और दो बच्चों के बावजूद एक पति ने अपनी पत्नी की शादी उसके प्रेमी से करवा दी। यह शादी गांव के मंदिर में हुई, जहां पति और बच्चे खुद मौजूद रहे। शादी के बाद पत्नी ने प्रेमी के पैर छुए, लेकिन जब उसने बच्चों को अपने साथ चलने के लिए कहा, तो दोनों बच्चों ने साफ इनकार कर दिया।
बच्चों ने अपनी मां से कहा— “तुमने हमारे पापा को छोड़ दिया, अब हमें भी भूल जाओ। हम तुम्हारे साथ नहीं रहेंगे।” यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
पूरा मामला प्रतापगढ़ के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के रमगढ़ा गांव का है। गांव निवासी आशीष तिवारी की शादी वर्ष 2016 में पिंकी से हुई थी। दोनों के दो बेटे हैं— एक 7 साल का और दूसरा 4 साल का। आशीष ने बताया कि शनिवार रात उन्होंने अपनी पत्नी पिंकी को उसके प्रेमी अमित शर्मा के साथ आपत्तिजनक हालत में रंगेहाथ पकड़ लिया था।
घटना के बाद आशीष ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और प्रेमी अमित शर्मा को थाने ले गई। इसके बाद थाने और गांव में घंटों तक पंचायत चली, जिसमें दोनों पक्षों के परिजन और गांव के वरिष्ठ लोग शामिल हुए।
पंचायत के दौरान पत्नी पिंकी ने साफ शब्दों में कहा कि वह अब अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती और अपने प्रेमी अमित शर्मा के साथ ही जीवन बिताएगी। गांव वालों और पति ने उसे कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अपने फैसले पर अड़ी रही।
यहां तक कि प्रेमी अमित शर्मा के पिता ने भी महिला को चेताया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा नशे का आदी है, कोई स्थायी काम नहीं करता और वह उसके खर्च नहीं उठा पाएगा। इसके बावजूद पिंकी ने अपना फैसला बदलने से इनकार कर दिया।
लंबी पंचायत और आपसी सहमति के बाद पति आशीष तिवारी ने गांव वालों की मौजूदगी में पत्नी की शादी उसके प्रेमी अमित शर्मा से कराने का फैसला किया। इसके बाद अमरगढ़ स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर में दोनों की शादी कराई गई। मंदिर में प्रेमी ने पिंकी की मांग में सिंदूर भरा और वरमाला पहनाई।
शादी के बाद जब पिंकी ने अपने बच्चों को साथ चलने के लिए कहा, तो दोनों बच्चों ने मां के साथ जाने से इनकार कर दिया। बच्चों ने पिता के साथ ही रहने की इच्छा जताई।
पति आशीष तिवारी ने कहा कि रोज-रोज के झगड़े और तनाव से बेहतर था कि दोनों की शादी करा दी जाए। उन्होंने कहा कि पंचायत की सहमति से यह फैसला लिया गया, ताकि आगे कोई विवाद न रहे।
इस मामले पर सीओ मनोज कुमार सिंह रघुवंशी ने बताया कि महिला बालिग है और अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति और पंचायत के बाद निर्णय लिया है। पुलिस की ओर से किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की गई है।
प्रतापगढ़ का यह मामला सिर्फ एक वैवाहिक विवाद नहीं, बल्कि सामाजिक रिश्तों, बच्चों की भावनाओं और पारिवारिक टूटन की एक गहरी तस्वीर पेश करता है। जहां एक ओर पत्नी ने अपने प्रेम को चुना, वहीं बच्चों ने पिता का साथ देकर मां से दूरी बना ली। यह घटना समाज में रिश्तों की जटिलता और पंचायत आधारित फैसलों पर एक नई बहस को जन्म देती है।
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