राजस्थान: की राजधानी जयपुर में अवैध भ्रूण लिंग जांच का एक बड़ा रैकेट सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और कानून दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत PCPNDT टीम ने गुरुवार को एक डॉक्टर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जो पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन के जरिए गर्भ में पल रहे भ्रूण का लिंग बताने का अवैध कारोबार चला रहे थे।
इस पूरे मामले का खुलासा एक डिकॉय ऑपरेशन के जरिए हुआ, जिसमें टीम ने एक महिला को ग्राहक बनाकर आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि आरोपी महिला से 80 हजार रुपए लेकर भ्रूण का लिंग बताते थे, जो कि PCPNDT एक्ट के तहत पूरी तरह गैरकानूनी है।
नेशनल हेल्थ मिशन के अधिकारियों को सूचना मिली थी कि जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में एक गिरोह सक्रिय है, जो पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन का इस्तेमाल कर भ्रूण का लिंग जांच कर रहा है। इस सूचना के आधार पर एडिशनल एसपी डॉ. हेमंत जाखड़ के नेतृत्व में टीम गठित की गई।
टीम ने एक महिला को डिकॉय ग्राहक बनाकर आरोपियों से संपर्क कराया। महिला को जयपुर के मुहाना क्षेत्र स्थित केसर चौहारा पर स्थित कुबेर हेल्थ केयर सेंटर बुलाया गया। यहां डॉक्टर शेर सिंह राजावत ने जांच के नाम पर 80 हजार रुपए की मांग की।
पैसे लेने के बाद महिला को एक दलाल के जरिए दूसरे स्थान पर भेजा गया। वहां से उसे कार में बैठाकर सांगानेर क्षेत्र स्थित मयूर रेजीडेंसी के एक फ्लैट में ले जाया गया। यही वह जगह थी, जहां असल में भ्रूण की जांच की जाती थी।
जैसे ही टीम को सही लोकेशन की जानकारी मिली, उन्होंने फ्लैट पर छापा मार दिया। मौके पर एक महिला और मुख्य आरोपी हरी कुमावत मौजूद मिला, जो मशीन के जरिए जांच कर रहा था।

पूछताछ में जो जानकारी सामने आई, वह बेहद हैरान करने वाली थी। मुख्य आरोपी हरी कुमावत सिर्फ 10वीं पास है, लेकिन वह पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन का इस्तेमाल कर भ्रूण का लिंग जांच रहा था। उसके साथ एक अन्य महिला शिला देवी भी इस काम में सहयोग कर रही थी, जो महिलाओं को इस नेटवर्क तक लाने का काम करती थी।
इस मामले में डॉक्टर शेर सिंह राजावत की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। बताया जा रहा है कि वह पूरे गिरोह को संचालित करने में शामिल था। फिलहाल उसकी डिग्री और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
इस गिरोह का एक अन्य सदस्य जगबीर अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार करने का दावा कर रही है।
भारत में भ्रूण लिंग जांच पूरी तरह प्रतिबंधित है। PCPNDT (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) Act के तहत इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद ऐसे रैकेट का सामने आना चिंता का विषय है।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त लिंग भेदभाव की मानसिकता को भी उजागर करता है। बेटियों को लेकर आज भी कई जगहों पर भेदभाव किया जाता है, जिसके चलते ऐसे गैरकानूनी काम पनपते हैं।
सरकार और प्रशासन लगातार इस दिशा में सख्ती बरत रहे हैं, लेकिन समाज की सोच में बदलाव के बिना इस समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं है।
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