जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं पर तीखा हमला बोला है। जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने मंत्रियों और विधायकों के बेटों को लेकर बड़ा बयान दिया। गहलोत ने कहा कि अगर नेताओं ने अपने बेटों को सत्ता से दूर नहीं रखा, तो यही बेटे सरकार की बदनामी का कारण बनेंगे।
गहलोत ने कहा कि सरकार बनने के बाद से ही मंत्रियों के परिवार, खासकर उनके बेटों को अनावश्यक रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति सरकार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा, “मंत्रियों, मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम को चाहिए कि वे अपने बेटों को सत्ता से दूर रखें। अगर उन्हें ज्यादा नजदीक लाया जाएगा, तो वे बिगड़ सकते हैं और उनकी गतिविधियों से सरकार की छवि खराब हो सकती है।”
गहलोत का यह बयान भीम विधायक के बेटे से जुड़े विवाद के संदर्भ में आया है, जिसने हाल ही में राजनीतिक हलकों में चर्चा पैदा की है।
पूर्व सीएम ने आगे कहा कि जब परिवार के लोग सत्ता के करीब आते हैं, तो उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अगर कोई विवाद होता है, तो उसकी बदनामी सिर्फ व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे सरकार और नेतृत्व पर असर डालती है।
उन्होंने कहा, “आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपका बेटा कहां क्या कर रहा है और कब सरकार को बदनाम करवा देगा।”
गहलोत ने इस दौरान विदेश मंत्री S. Jaishankar के एक बयान पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यूएस-ईरान शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह उचित नहीं है।
गहलोत ने कहा कि विदेश मंत्री को ‘दलाली’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए था। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि इस पर माफी मांगी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “एक विदेश मंत्री को इतनी बड़ी जिम्मेदारी के साथ शब्दों का चयन करना चाहिए। यह जुबान फिसलना भी हो सकता है, लेकिन ऐसे में माफी मांगना बेहतर होता।”
गहलोत ने मौजूदा वैश्विक हालात पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश की स्थिति पहले से काफी बदल गई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi के समय का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में भारत ने 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर किया था, जबकि आज हालात अलग हैं।
उन्होंने कहा, “हम कहां से कहां पहुंच गए हैं, यह देश के सामने है। लोगों में चिंता है कि देश किस दिशा में जा रहा है।”
गहलोत ने गैस संकट के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति पहले से ही भांपी जा सकती थी और समय रहते तैयारी करनी चाहिए थी।
उन्होंने Rahul Gandhi का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही इस तरह की स्थिति को लेकर आगाह किया था, लेकिन सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए।
गहलोत के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण हालात और बिगड़ सकते हैं और इसका असर आम जनता पर पड़ेगा।
गहलोत के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। बीजेपी की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि इस पर पलटवार किया जा सकता है।
राजस्थान की राजनीति में यह बयान एक नई बहस को जन्म दे सकता है, खासकर परिवारवाद और सत्ता के दुरुपयोग के मुद्दे पर।
अशोक गहलोत का यह बयान न केवल राज्य की राजनीति में हलचल पैदा करता है, बल्कि यह सत्ता और परिवार के रिश्तों पर भी सवाल उठाता है। साथ ही विदेश नीति पर उनकी टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
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