नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई संकट के बीच भारत अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। सरकारी तेल कंपनियां अब अंगोला से रसोई गैस (LPG) खरीदने की तैयारी कर रही हैं, जिससे खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum, Hindustan Petroleum और GAIL जैसी कंपनियां अंगोला की सरकारी कंपनी Sonangol के साथ बातचीत कर रही हैं।
भारत वर्तमान में अपनी करीब 92% LPG जरूरतें फारस की खाड़ी के देशों—संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत—से पूरी करता है।
इन सभी देशों से आने वाली गैस होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचती है, जो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा मार्ग माना जाता है।
ईरान-इजराइल तनाव के चलते इस मार्ग पर खतरा बढ़ गया है, जिससे भारत वैकल्पिक रास्ते और सप्लायर्स की तलाश कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंगोला कई कारणों से भारत के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है:
सबसे अहम बात यह है कि अंगोला से आने वाले जहाजों को अटलांटिक महासागर और अरब सागर के रास्ते सीधे भारत पहुंचाया जा सकता है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अगर यह डील फाइनल होती है, तो यह पहली बार होगा जब अंगोला भारत को LPG सप्लाई करेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय कंपनियां LPG के लिए लगभग एक साल और LNG के लिए 10 साल तक के लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर विचार कर रही हैं।
अंगोला के पास करीब 4.6 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का भंडार है और वह पहले से भारत को कच्चा तेल और LNG सप्लाई करता रहा है।
भारत केवल अंगोला तक सीमित नहीं है। सरकार ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी LPG और LNG आयात के विकल्प तलाश रही है।
इस रणनीति का उद्देश्य सप्लाई को विविध बनाना और किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का करीब 60% गैस आयात करता है।
आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में भारत ने 31.32 मिलियन टन LPG का उपयोग किया, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग स्थिर रहा।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों परिवारों को गैस कनेक्शन मिलने से मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में देश में 33 करोड़ से ज्यादा एक्टिव LPG कनेक्शन हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव लंबा खिंचता है, तो इसका असर भारत के उर्वरक, स्टील और ऊर्जा सेक्टर पर पड़ सकता है।
महंगे कच्चे तेल और गैस की कीमतों के कारण भारत को अधिक कीमत पर इंपोर्ट करना पड़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी है।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
भारत की यह नई रणनीति ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अंगोला जैसे नए सप्लायर्स के साथ समझौते से न केवल जोखिम कम होगा, बल्कि सप्लाई चेन भी अधिक स्थिर और सुरक्षित बनेगी। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह डील कितनी जल्दी फाइनल होती है और इसका घरेलू बाजार पर क्या असर पड़ता है।
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