“वक्फ का दावा बेअसर!” कब्जा साबित न होने पर हाईकोर्ट ने हटाया स्टे, जेडीए-नगर निगम को बड़ी राहत

राजस्थान: के Jodhpur में वक्फ संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद में Rajasthan High Court ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यदि किसी संपत्ति पर वास्तविक कब्जा साबित नहीं होता, तो उस पर अस्थायी रोक (स्टे) नहीं दी जा सकती।

जस्टिस Mukesh Rajpurohit की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और नगर निगम को बड़ी राहत दी है। अदालत ने वक्फ ट्रिब्यूनल के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें विवादित बगीचे पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला जोधपुर के एक बगीचे से जुड़ा है, जिस पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किया गया था। Rajasthan Waqf Board के समक्ष सलीम चौहान ने अर्जी दायर कर कहा था कि यह संपत्ति 1966 के एक विनिमय पत्र और वक्फ रजिस्टर में दर्ज है, इसलिए इसे वक्फ संपत्ति माना जाए।

इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने 20 नवंबर 2025 को जेडीए और नगर निगम को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इस आदेश को जेडीए ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

जेडीए और नगर निगम के तर्क

जेडीए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Dr Sachin Acharya ने दलील दी कि 1966 के दस्तावेज में विवादित बगीचे का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसे केवल सीमा विवरण में दर्शाया गया है, न कि संपत्ति के रूप में।

नगर निगम की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन निगम के नाम दर्ज है। साथ ही वादी पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि उसे इस संपत्ति का वास्तविक कब्जा कभी सौंपा गया था।

वादी पक्ष की दलीलें

वादी मजलिस की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि वे लंबे समय से इस संपत्ति का उपयोग कर रहे हैं और यदि वहां निर्माण या अन्य गतिविधियां होती हैं, तो संपत्ति की प्रकृति बदल जाएगी, जिससे उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।

उन्होंने अपने पक्ष में कई न्यायिक फैसलों का हवाला भी दिया, लेकिन अदालत इन तर्कों से संतुष्ट नहीं हुई।

हाईकोर्ट का स्पष्ट रुख

Rajasthan High Court ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी संपत्ति पर अस्थायी रोक लगाने के लिए यह आवश्यक है कि वादी अपने कब्जे को prima facie साबित करे। इस मामले में ऐसा कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया।

अदालत ने यह भी कहा कि केवल दस्तावेजी दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक नियंत्रण और उपयोग का प्रमाण भी जरूरी है।

क्या होगा आगे?

इस फैसले के बाद जेडीए और नगर निगम को विवादित जमीन पर अपने अधिकारों का उपयोग करने की छूट मिल गई है। वहीं वादी पक्ष के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वादी के पास ठोस साक्ष्य हैं, तो वे उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह निर्णय वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल कागजी दावों के आधार पर सार्वजनिक संस्थाओं के कार्यों में बाधा नहीं डाली जा सकती।


निष्कर्ष

Rajasthan High Court का यह फैसला संपत्ति विवादों में “कब्जे” की अहमियत को रेखांकित करता है। अदालत ने साफ कर दिया कि बिना ठोस सबूत के किसी भी संपत्ति पर रोक लगाना उचित नहीं है। इस निर्णय से जेडीए और नगर निगम को राहत मिली है, वहीं वक्फ बोर्ड के दावों पर भी सख्त संदेश गया है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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