देश: की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने प्रमुख नेता राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया है। यह फैसला गुरुवार को लिया गया और इसकी जानकारी राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र के जरिए दी गई।
पार्टी ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि अब राघव चड्ढा को सदन में पार्टी की ओर से बोलने का समय नहीं दिया जाए। इस निर्णय ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि राघव चड्ढा AAP के प्रमुख और चर्चित चेहरों में से एक माने जाते हैं।
AAP ने उनकी जगह अशोक मित्तल को राज्यसभा का नया उपनेता नियुक्त किया है। मित्तल भी पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और एक सफल उद्योगपति के रूप में पहचान रखते हैं। वे जालंधर स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चांसलर भी हैं।
हालांकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस फैसले के पीछे कोई कारण नहीं बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राघव चड्ढा का पिछले कुछ समय से पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाना एक प्रमुख वजह हो सकती है।
बताया जा रहा है कि राघव चड्ढा लंबे समय से पार्टी के कार्यक्रमों और बयानों से दूर रहे हैं। यहां तक कि जब अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति मामले में अदालत से राहत मिली, तब भी उन्होंने कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व उनके इस रुख से संतुष्ट नहीं था, जिसके चलते यह बड़ा कदम उठाया गया।
हालांकि पार्टी से दूरी के बावजूद राघव चड्ढा संसद में सक्रिय नजर आए। उन्होंने राज्यसभा में कई जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए, जिससे उनकी अलग पहचान बनी।
शीतकालीन सत्र 2025 में उन्होंने गिग वर्कर्स के अधिकारों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। Zomato, Swiggy और Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स के कम वेतन और सामाजिक सुरक्षा की कमी पर उन्होंने चिंता जताई।
इसके अलावा उन्होंने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के अधिकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और ‘वन नेशन, वन हेल्थ ट्रीटमेंट’ जैसे मुद्दों को भी संसद में उठाया।
बजट सत्र 2026 में भी राघव चड्ढा ने कई जनहित के मुद्दे उठाए। इनमें खाद्य मिलावट, एयरपोर्ट्स पर सस्ते खाने की व्यवस्था, और मोबाइल रिचार्ज प्लान को 28 दिन के बजाय पूरे महीने का करने की मांग शामिल थी।
उन्होंने बैंकिंग सिस्टम में मिनिमम बैलेंस पर लगने वाली पेनल्टी खत्म करने, विवाहित जोड़ों के लिए संयुक्त इनकम टैक्स फाइलिंग और पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने जैसे प्रस्ताव भी रखे।
नई जिम्मेदारी पाने वाले अशोक मित्तल राजनीति में अपेक्षाकृत नए हैं, लेकिन बिजनेस और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ है। AAP नेतृत्व ने उन्हें यह अहम जिम्मेदारी देकर यह संकेत दिया है कि पार्टी अब नए चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव पार्टी के अंदरूनी संतुलन और भविष्य की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
AAP द्वारा राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाना एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। यह न सिर्फ पार्टी के अंदर चल रहे बदलावों को दर्शाता है, बल्कि आने वाले समय में AAP की रणनीति में संभावित बदलाव की ओर भी इशारा करता है।
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