Dausa: में आयोजित एक साइबर जागरूकता कार्यक्रम के दौरान जिला एवं सेशन जज Keshav Kaushik ने छात्रों को साइबर फ्रॉड के खतरों के बारे में आगाह किया। उन्होंने एक चौंकाने वाला उदाहरण देते हुए बताया कि भरतपुर में एक मामले में उन्हें 9 साल के बच्चे को भी दंड देना पड़ा था।
यह बयान सुनकर कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राएं और शिक्षक हैरान रह गए। जज ने स्पष्ट किया कि डिजिटल युग में अपराध की कोई उम्र नहीं होती और अनजाने में की गई गलती भी गंभीर परिणाम ला सकती है।
यह कार्यक्रम विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें इंपल्स स्कूल के विद्यार्थियों को साइबर अपराध और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।
जज ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि इंटरनेट का इस्तेमाल जितना आसान है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है, यदि सावधानी न बरती जाए। उन्होंने बच्चों को ‘कोर्ट वाली दीदी’ के नाम से शिकायत पेटिका में अपनी समस्याएं लिखकर देने की सलाह भी दी।
Keshav Kaushik ने साइबर ठगी के आम तरीकों को बेहद सरल भाषा में समझाया:
उन्होंने कहा कि इन सभी तरीकों का एक ही उद्देश्य होता है—लोगों को झांसे में लेकर उनका पैसा हड़पना।
जज ने खासतौर पर बच्चों और युवाओं को सावधान करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के दौरान ज्यादा सतर्क रहें। कई बार गेमिंग या फर्जी ऑफर्स के जरिए बच्चों को टारगेट किया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या पुलिस को सूचना दें।
जागरूकता कार्यक्रम में जज ने बचाव के कई महत्वपूर्ण टिप्स भी दिए:
उन्होंने बताया कि किसी भी तरह की साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।
आज के समय में डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में बच्चों को कम उम्र से ही साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को न केवल जागरूक बनाते हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने में भी मदद करते हैं।
दौसा में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि साइबर दुनिया में छोटी सी गलती भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। चाहे बच्चा हो या बड़ा, हर किसी को डिजिटल सुरक्षा के नियमों का पालन करना जरूरी है। जागरूकता ही साइबर फ्रॉड से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।
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