सीजफायर के कुछ घंटों में ही हमला! ईरान के लावन द्वीप पर रिफाइनरी निशाने पर, कुवैत में ड्रोन अटैक से बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व: में हालात एक बार फिर विस्फोटक होते नजर आ रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया युद्धविराम (सीजफायर) के कुछ ही घंटों बाद नए हमलों की खबरों ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।

ताजा घटनाक्रम के अनुसार, लावन द्वीप पर स्थित एक अहम तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले के बाद रिफाइनरी में आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दमकलकर्मी लगातार प्रयास कर रहे हैं। राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन नुकसान का आकलन अभी जारी है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हमला किसकी ओर से किया गया। इस अनिश्चितता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने भी बयान जारी कर कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय है और वह संभावित मिसाइल खतरों का जवाब दे रही है।

दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत में ड्रोन हमले किए हैं। कुवैती रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सुबह करीब पांच बजे के बाद से कुल 28 ड्रोन मार गिराए गए। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने इसे “बड़ा और खतरनाक हमला” बताया।

कुवैत का दावा है कि इन ड्रोन का निशाना तेल संयंत्र, बिजली घर और जल आपूर्ति से जुड़े अहम ढांचे थे। कुछ ड्रोन दक्षिणी हिस्से में स्थित ऊर्जा केंद्रों की ओर बढ़ रहे थे, जिन्हें समय रहते रोक लिया गया। हालांकि, कुछ स्थानों पर नुकसान की भी खबर है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी। इस समझौते को क्षेत्र में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा था, लेकिन ताजा हमलों ने इस उम्मीद को झटका दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्धविराम से पहले ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया और समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा। उन्होंने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की भी बात कही थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि जमीन पर हालात अभी भी बेहद अस्थिर हैं। युद्धविराम के बावजूद क्षेत्रीय ताकतों के बीच अविश्वास बना हुआ है, जो किसी भी समय बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संगठनों ने कहा है कि यदि स्थिति को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।

मध्य पूर्व का यह क्षेत्र पहले ही वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का संघर्ष पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।


निष्कर्ष:

सीजफायर के बावजूद ईरान और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में जारी हमले यह दिखाते हैं कि शांति अभी दूर है। यदि हालात जल्द नहीं संभाले गए, तो यह संघर्ष एक बार फिर बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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