राजधानी: जयपुर में अवैध दवा कारोबार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित रूप से सेक्सुअल बीमारी के इलाज के नाम पर बिना अनुमति इंजेक्शन ऑनलाइन बेचे जा रहे थे। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) और राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की संयुक्त टीम ने गोपालपुरा बाइपास स्थित Bhandari Hospital पर छापा मारा।
ड्रग कंट्रोलर राजस्थान अजय फाटक के अनुसार, टीम को सूचना मिली थी कि गुजरात सहित अन्य राज्यों में ‘ट्राइमेक्स’ नाम से एक इंजेक्शन ऑनलाइन बेचा जा रहा है। जांच में सामने आया कि इस नाम से कोई भी दवा आधिकारिक रूप से रजिस्टर्ड नहीं है।
बताया गया कि इस कथित इंजेक्शन को तीन अलग-अलग दवाओं—Papaverine, Alprostadil और Chlorpromazine—की छोटी-छोटी डोज मिलाकर तैयार किया जा रहा था।
हालांकि, इन दवाओं का संयोजन डॉक्टर द्वारा अस्पताल में इलाज के दौरान उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसे ‘ट्राइमेक्स’ ब्रांड बनाकर बाजार में बेचना पूरी तरह अवैध है।
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के एक कर्मचारी मनीष कुमार सोनी ने इस पूरे नेटवर्क को संचालित किया। वह 2019 से अस्पताल में सहायक के रूप में कार्यरत था।
आरोप है कि उसने डॉक्टरों के फर्जी साइन कर मरीजों को दवाएं भेजीं और भुगतान अपने निजी खातों में मंगवाया। इतना ही नहीं, उसने अस्पताल की फार्मेसी के जीएसटी नंबर का इस्तेमाल कर नकली बिल और दस्तावेज तैयार किए।
मरीजों से वह खुद को डॉक्टर बताकर अधिक शुल्क वसूलता था और इलाज के नाम पर मनमानी दवाएं लिखता था।
मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने इसे एक “व्यक्तिगत घोटाला” बताया। उनका कहना है कि आरोपी कर्मचारी ने “ओमेन फार्मेसी” के नाम से यह पूरा खेल रचा और अस्पताल के नाम का दुरुपयोग किया।
अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वे केवल अनुमोदित और रजिस्टर्ड दवाओं का ही उपयोग करते हैं और किसी भी प्रकार की ऑनलाइन या अनधिकृत दवा बिक्री से उनका कोई संबंध नहीं है।
साथ ही, आरोपी के खिलाफ साइबर थाने में FIR दर्ज कराई जा चुकी है।
इस मामले में ड्रग कंट्रोल विभाग अब अस्पताल के सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर चिराग भंडारी के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इसके लिए Rajasthan Medical Council (RMC) को पत्र भेजा जाएगा।
यदि जांच में डॉक्टर की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ मेडिकल लाइसेंस से संबंधित सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
छापेमारी के दौरान टीम ने अस्पताल से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। अब इन दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर मरीजों की जान से जुड़ा मामला है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन दवा बिक्री के बढ़ते चलन के बीच इस तरह के फर्जीवाड़े के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। बिना डॉक्टर की सलाह और बिना रजिस्ट्रेशन वाली दवाओं का इस्तेमाल गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि ऑनलाइन मेडिकल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी कितनी प्रभावी है।
जयपुर का ‘ट्राइमेक्स इंजेक्शन’ मामला स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते फर्जीवाड़े की गंभीर तस्वीर पेश करता है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में कितनी सख्ती से कार्रवाई करती हैं और दोषियों को कब तक सजा मिलती है। मरीजों की सुरक्षा के लिए ऐसे मामलों पर सख्त नियंत्रण बेहद जरूरी है।
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