राजस्थान: के पाली जिले से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों—मां और दो बेटों—ने सामूहिक आत्महत्या कर ली। इस दर्दनाक घटना के पीछे जो वजह सामने आई है, वह और भी चौंकाने वाली है। परिवार का बड़ा बेटा अपने ही घर को “अपशकुनी” मानने लगा था और इसी मानसिक भय ने पूरे परिवार को खत्म कर दिया।
मामले के अनुसार, मृतक नरपत लंबे समय से मानसिक तनाव में था। वह अपने घर को अशुभ मानता था और बार-बार यह कहता था कि इस मकान को खरीदने के बाद ही उसके परिवार पर मुसीबतें टूट पड़ीं। उसने यह घर साल 2024 में खरीदा था और महज 7 दिन बाद ही उसके पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसके बाद उसकी मां भी लगातार बीमार रहने लगीं।
रिश्तेदारों के अनुसार, नरपत को लगने लगा था कि यह घर उनके लिए दुर्भाग्य लेकर आया है। वह अक्सर कहता था कि उसके शरीर में गांठें बन रही हैं और दिल में भी समस्या है। उसे शक था कि ये कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। इस डर ने धीरे-धीरे उसे गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में धकेल दिया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आत्महत्या से पहले नरपत ने पूरी योजना बनाई थी। उसने 8 अप्रैल को अपने रिश्तेदारों—मौसेरे भाई लक्ष्मण, चचेरे भाई राजेश और पड़ोसी सौरभ—को घर बुलाया था। उसने उनसे कहा था कि अगर फोन न लगे तो सीधे घर आ जाना।
यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि नरपत चाहता था कि आत्महत्या के बाद परिवार की जानकारी जल्दी बाहर आए। हालांकि जब रिश्तेदार घर पहुंचे, तो दरवाजा नहीं खुला और अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। बाद में पुलिस को सूचना दी गई और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया, जहां तीनों के शव मिले।
मौके से मिले सुसाइड नोट में नरपत ने लिखा कि उसकी मां को कैंसर है और उसे खुद भी गंभीर बीमारी होने का शक है। उसने लिखा कि अगर वे दोनों मर जाएंगे तो छोटे भाई की देखभाल कौन करेगा। इसी सोच के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
यह घटना मानसिक स्वास्थ्य और जागरूकता की कमी की ओर भी इशारा करती है। बिना मेडिकल जांच के बीमारी का डर और अंधविश्वास ने पूरे परिवार को खत्म कर दिया।
घटना के बाद जब पुलिस ने मृतकों के गहने उनकी बेटी को सौंपे, तो वह फूट-फूटकर रोने लगी। उसने बिलखते हुए कहा—“भगवान, मेरे साथ ऐसा क्यों किया? अब मैं अकेली क्या करूंगी?” उसकी यह दर्द भरी चीख वहां मौजूद हर शख्स को अंदर तक झकझोर गई।
पाली के पॉश इलाके में हुई इस घटना के बाद आसपास के लोग भी सदमे में हैं। पड़ोसियों का कहना है कि परिवार सामान्य दिखता था, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि अंदर ही अंदर इतना बड़ा संकट चल रहा है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। हालांकि शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि यह आत्महत्या का मामला है, जिसमें मानसिक तनाव और अंधविश्वास बड़ी वजह रहे।
पाली की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। मानसिक स्वास्थ्य, समय पर इलाज और सही सलाह की कमी कभी-कभी इतनी बड़ी कीमत वसूल लेती है। अंधविश्वास और डर इंसान को ऐसी राह पर ले जा सकते हैं, जहां से वापसी संभव नहीं होती। ऐसे मामलों में जागरूकता और परिवार का सहयोग बेहद जरूरी है।
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