जयपुर: में दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा और चिंताजनक मामला सामने आया है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट द्वारा लिए गए एक एंटीबायोटिक दवा के सैंपल की जांच में गंभीर खामियां पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट में यह दवा पूरी तरह अवमानक (सब-स्टैंडर्ड) घोषित की गई है, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह दवा बाजार में Killmed-625 (किलमेड-625) के नाम से बेची जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस दवा में वह जरूरी तत्व ही नहीं पाया गया, जिसका दावा कंपनी द्वारा किया गया था। दवा में अमोक्सिसिलिन और क्लैवुलैनिक एसिड का संयोजन बताया गया था, लेकिन जांच में क्लेवुलैनिक एसिड अनुपस्थित पाया गया।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग के ड्रग कंट्रोल ऑफिसर (DCO) अजय फाटक के अनुसार, विभाग ने कुछ समय पहले इस दवा का सैंपल बाजार से लिया था। सरकारी लैब में परीक्षण के बाद यह सामने आया कि दवा अपने घोषित मानकों पर खरी नहीं उतरती।
कंपनी ने दावा किया था कि यह दवा बैक्टीरियल संक्रमण से लड़ने के लिए प्रभावी एंटीबायोटिक है। लेकिन क्लेवुलैनिक एसिड की अनुपस्थिति के कारण यह दवा संक्रमण के इलाज में प्रभावी नहीं रह जाती।
जांच के बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जयपुर स्थित मैसर्स आई क्यूमेड हेल्थकेयर से करीब 12 लाख 78 हजार रुपए की दवा जब्त कर ली। यह कदम मरीजों को संभावित खतरे से बचाने के लिए उठाया गया।
इससे पहले भी इसी फर्म से लगभग 4 लाख रुपए की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं, जिससे यह साफ होता है कि मामला एक बार का नहीं बल्कि लगातार लापरवाही या गड़बड़ी का संकेत देता है।
यह दवा हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित मैसर्स वीएडीएसपी फार्मास्यूटिकल्स द्वारा निर्मित बताई गई है। अब विभाग इस कंपनी की भूमिका और उत्पादन प्रक्रिया की भी जांच कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबायोटिक दवाओं में इस तरह की कमी बेहद गंभीर हो सकती है। क्लेवुलैनिक एसिड का काम बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता को कम करना होता है, जिससे अमोक्सिसिलिन प्रभावी ढंग से काम कर सके।
यदि यह तत्व मौजूद न हो, तो:
यह स्थिति खासतौर पर गंभीर मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
इस मामले के सामने आने के बाद फूड और ड्रग डिपार्टमेंट ने बाजार में बिक रही अन्य दवाओं की भी जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जनता की सेहत से खिलवाड़ किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विभाग ने संकेत दिए हैं कि दोषी कंपनी और सप्लायर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
डिपार्टमेंट ने लोगों से अपील की है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें और किसी भी संदिग्ध दवा की जानकारी तुरंत विभाग को दें। साथ ही मेडिकल स्टोर्स को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल प्रमाणित और गुणवत्ता वाली दवाएं ही बेचें।
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