‘हाथी खिलौना नहीं!’ जयपुर में फूटा गुस्सा—आमेर में सवारी बंद करने की मांग, पिंक एलिफेंट फोटोशूट पर बवाल

राजधानी: जयपुर में गुरुवार को ‘सेव द एलिफेंट डे’ के मौके पर हाथियों के शोषण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। Jawahar Circle पर जुटे युवा कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने हाथियों को मनोरंजन का साधन बनाने के खिलाफ आवाज उठाई। इस दौरान आमेर में पर्यटकों के लिए कराई जाने वाली हाथी सवारी को बंद करने की मांग भी प्रमुखता से उठी।

पिंक एलिफेंट फोटोशूट बना विरोध की वजह

यह प्रदर्शन रूसी फोटोग्राफर Julia Buruleva के ‘पिंक एलिफेंट’ फोटोशूट के विरोध में आयोजित किया गया। इस फोटोशूट में जयपुर के हाथी गांव के एक हाथी को गुलाबी रंग में रंगकर मॉडल के साथ तस्वीरें खींची गई थीं। जैसे ही ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और आम लोगों में नाराजगी फैल गई।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसी भी जानवर को इस तरह रंगना और उसे शोपीस की तरह इस्तेमाल करना क्रूरता की श्रेणी में आता है। उन्होंने इसे हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार और स्वास्थ्य के खिलाफ बताया।

‘हाथी मनोरंजन का साधन नहीं’—कार्यकर्ताओं का संदेश

प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने पोस्टर और बैनर के जरिए लोगों को जागरूक करने की कोशिश की। उनका कहना था कि हाथी अत्यंत संवेदनशील और बुद्धिमान जीव होते हैं, जिन्हें सिर्फ पर्यटन और मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करना गलत है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आमेर किले में हाथी सवारी के दौरान जानवरों को कठोर परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। तेज धूप, भारी वजन और लंबी दूरी तय करने के कारण उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।

आमेर किले में हाथी सवारी पर उठे सवाल

Amer Fort में हाथी सवारी लंबे समय से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है, लेकिन अब इसे लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाथियों को सीमित जगह में रखा जाता है, जहां वे अपने प्राकृतिक व्यवहार के अनुसार जीवन नहीं जी पाते।

पशु कल्याण से जुड़े संगठनों ने पहले भी इस मुद्दे को उठाया है। Animal Welfare Board of India और Project Elephant जैसी संस्थाओं ने हाथियों के संरक्षण और बेहतर जीवन के लिए कई सिफारिशें दी हैं।

कैद में हाथियों की स्थिति चिंताजनक

World Animal Protection के अनुसार, भारत में 2,500 से अधिक हाथी कैद में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कैद का वातावरण हाथियों के लिए उपयुक्त नहीं होता। जंगल में हाथी रोजाना 20 किलोमीटर तक चलते हैं, जबकि कैद में यह संभव नहीं है।

वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों का कहना है कि अकेले रखे गए हाथियों में मानसिक तनाव बढ़ जाता है। वे अक्सर झूलने जैसी गतिविधियां करते हैं, जो उनके तनाव का संकेत है।

हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

हाल के वर्षों में हाथियों से जुड़ी कई घटनाओं ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। काजीरंगा नेशनल पार्क में ‘स्वर्णिमोयी’ नामक हाथी की मौत, त्रिपुरा में हाथियों की मौतें और उत्तराखंड के पार्कों में हाथी सफारी की वापसी ने पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।

सरकार से की गई मांगें

प्रदर्शनकारियों ने राजस्थान सरकार से मांग की है कि आमेर किले में हाथी सवारी को पूरी तरह बंद किया जाए और हाथियों को सुरक्षित अभयारण्यों में स्थानांतरित किया जाए। उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि पर्यटन के नाम पर जानवरों के शोषण को रोका जाए।


निष्कर्ष:

जयपुर में हुआ यह प्रदर्शन सिर्फ एक फोटोशूट या सवारी के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जानवरों के अधिकारों और उनके सम्मानजनक जीवन की मांग का प्रतीक बन गया है। बढ़ती जागरूकता के बीच अब यह देखना अहम होगा कि सरकार और प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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