दौसा में दिव्यांगों को बड़ी राहत! अस्पतालों में बने अलग मेडिकल बोर्ड, अब हर शुक्रवार-शनिवार लगेंगे विशेष कैंप

राजस्थान: के दौसा जिले में दिव्यांगजनों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से लंबित पड़े दिव्यांग प्रमाण पत्रों के मामलों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर देवेंद्र कुमार के निर्देश पर जिला अस्पताल दौसा और लालसोट में एक-एक अतिरिक्त मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है, जिससे प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज होगी।

अब जिला अस्पताल दौसा में प्रत्येक शनिवार (महीने के दूसरे शनिवार को छोड़कर) विशेष मेडिकल बोर्ड कैंप आयोजित किए जाएंगे। वहीं लालसोट क्षेत्र में प्रत्येक शुक्रवार को विशेष यूडीआईडी कैंप लगाया जाएगा। इस फैसले से जिले के हजारों दिव्यांग आवेदकों को राहत मिलने की उम्मीद है।


क्यों जरूरी था अतिरिक्त मेडिकल बोर्ड?

पिछले कुछ महीनों से यूडीआईडी (Unique Disability ID) पोर्टल पर लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही थी। कई दिव्यांगजन प्रमाण पत्र के लिए अस्पतालों के चक्कर काट रहे थे। प्रमाण पत्र के अभाव में उन्हें सरकारी योजनाओं, पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य लाभों से वंचित रहना पड़ रहा था।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड के विस्तार और अतिरिक्त कैंप लगाने का निर्णय लिया। उद्देश्य साफ है—दिव्यांगजनों को समय पर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना और पेंडेंसी कम करना।


जिला अस्पताल दौसा में हर शनिवार विशेष कैंप

जिला अस्पताल दौसा के पीएमओ डॉ. आरके मीणा ने अतिरिक्त मेडिकल बोर्ड गठित कर विशेष कैंप आयोजित करने के आदेश जारी किए हैं।

आदेश के अनुसार:

  • प्रत्येक शनिवार (दूसरे शनिवार को छोड़कर) विशेष दिव्यांगता निर्धारण कैंप लगेगा।

  • दिव्यांगता का परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को गति दी जाएगी।

  • पहले से चल रहे मंगलवार और गुरुवार के यूडीआईडी बोर्ड कैंप भी जारी रहेंगे।

इस तरह अब सप्ताह में तीन दिन दिव्यांग प्रमाण पत्र से संबंधित सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, जिससे आवेदकों को तेजी से राहत मिलेगी।


तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों को सौंपी जिम्मेदारी

विशेष कैंप के सुचारू संचालन के लिए तीन विषय विशेषज्ञों को नियुक्त किया गया है:

  • अस्थि रोग (ऑर्थोपेडिक) जांच के लिए सहायक आचार्य डॉ. सैयद साहिल अली

  • नाक, कान और गला (ईएनटी) जांच के लिए सहायक आचार्य डॉ. संजय शर्मा

  • मानसिक स्वास्थ्य जांच के लिए सह आचार्य, मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका भारद्वाज

इन विशेषज्ञों की नियुक्ति से दिव्यांगता निर्धारण की प्रक्रिया अधिक सटीक और पारदर्शी होगी। अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता के लिए विशेषज्ञ जांच जरूरी होती है, जिससे प्रमाण पत्र की वैधता और विश्वसनीयता बनी रहती है।


लालसोट में हर शुक्रवार विशेष यूडीआईडी बोर्ड

लालसोट क्षेत्र के दिव्यांगजनों को राहत देने के लिए भी प्रशासन ने विशेष कदम उठाए हैं। लालसोट में अब प्रत्येक शुक्रवार को विशेष यूडीआईडी बोर्ड कैंप लगाया जाएगा।

सीएमएचओ डॉ. सीताराम मीणा ने बताया कि नए यूडीआईडी पोर्टल पर लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए बुधवार को लगने वाले नियमित कैंप के अलावा अब शुक्रवार को भी अतिरिक्त कैंप आयोजित किया जाएगा।

लालसोट मेडिकल बोर्ड में शामिल विशेषज्ञ

  • जिला अस्पताल लालसोट के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. केके यादव

  • उप जिला अस्पताल रामगढ़ पचवारा के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल नारोलिया

  • उप जिला अस्पताल मण्डावरी के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. दिनेश बड़ीवाल

इन विशेषज्ञों की टीम विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता का परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी करेगी।


दिव्यांग प्रमाण पत्र क्यों है महत्वपूर्ण?

दिव्यांग प्रमाण पत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि कई सरकारी योजनाओं का प्रवेश द्वार है। इसके माध्यम से दिव्यांगजन:

  • पेंशन योजना का लाभ ले सकते हैं

  • सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं

  • छात्रवृत्ति प्राप्त कर सकते हैं

  • रेलवे एवं बस यात्रा में रियायत पा सकते हैं

  • चिकित्सा सुविधाओं में प्राथमिकता प्राप्त कर सकते हैं

यदि प्रमाण पत्र समय पर नहीं बनता, तो लाभार्थी कई योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। इसलिए मेडिकल बोर्ड की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है।


पेंडेंसी कम करने पर जोर

कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने दिव्यांग प्रमाण पत्रों की बढ़ती पेंडेंसी को गंभीरता से लिया। समीक्षा बैठक में पाया गया कि यूडीआईडी पोर्टल पर कई आवेदन लंबित हैं। इसके बाद अतिरिक्त बोर्ड गठन और विशेष कैंप की योजना बनाई गई।

प्रशासन का लक्ष्य है कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण हो और भविष्य में पेंडेंसी दोबारा न बढ़े।


यूडीआईडी पोर्टल क्या है?

यूडीआईडी (Unique Disability ID) भारत सरकार की एक पहल है, जिसके तहत दिव्यांगजनों को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाती है। इससे:

  • देशभर में एक समान पहचान मिलती है

  • डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है

  • योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिलता है

  • फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगती है

हालांकि तकनीकी कारणों और सीमित बोर्ड बैठकों के चलते कई जिलों में पेंडेंसी बढ़ी थी।


दिव्यांगजनों की प्रतिक्रिया

इस निर्णय के बाद दिव्यांगजनों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। कई आवेदकों ने बताया कि पहले उन्हें तारीख मिलने में लंबा समय लगता था। अब नियमित और अतिरिक्त कैंप से प्रक्रिया आसान होगी।

स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन के इस कदम की सराहना की है और इसे जनहित में उठाया गया महत्वपूर्ण निर्णय बताया है।


प्रशासन की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने दिव्यांग आवेदकों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथियों पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ समय पर अस्पताल पहुंचें। अधूरे दस्तावेज या अनुपस्थित रहने से प्रक्रिया में देरी हो सकती है।

आवश्यक दस्तावेजों में शामिल हैं:

  • आधार कार्ड

  • मेडिकल रिकॉर्ड

  • पूर्व प्रमाण पत्र (यदि हो)

  • पासपोर्ट साइज फोटो


भविष्य की योजना

प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि आवेदनों की संख्या अधिक रहती है तो आगे और अतिरिक्त बोर्ड भी गठित किए जा सकते हैं। लक्ष्य है कि कोई भी दिव्यांगजन केवल कागजी प्रक्रिया के कारण लाभ से वंचित न रहे।


निष्कर्ष:

दौसा और लालसोट में अतिरिक्त मेडिकल बोर्ड का गठन दिव्यांगजनों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। नियमित और विशेष कैंपों से न केवल लंबित मामलों का निस्तारण होगा, बल्कि भविष्य में पेंडेंसी भी नियंत्रित रहेगी।

यह पहल प्रशासन की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाती है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू रहती है, तो जिले के हजारों दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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