राजस्थान: की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जयपुर में एक बार फिर रंगों, रचनात्मकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। राजधानी Jaipur के प्रसिद्ध सांस्कृतिक केंद्र Jawahar Kala Kendra में 17 मार्च से 21 मार्च तक पांच दिवसीय ‘कला मेला’ आयोजित किया जा रहा है। इस बार यह आयोजन अपने 25वें संस्करण के साथ खास महत्व रखता है।
इस मेले का आयोजन Rajasthan Lalit Kala Academy द्वारा किया जा रहा है, जिसे कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार और जवाहर कला केन्द्र का सहयोग प्राप्त है। आयोजकों के अनुसार मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और 17 मार्च को शाम 6 बजे इसका औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा।
आयोजकों का कहना है कि यह कला मेला विशेष रूप से राजस्थान के युवा और उभरते कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। यहां कलाकार अपनी पेंटिंग्स, कलाकृतियां और अन्य रचनात्मक कार्यों को प्रदर्शित कर सकते हैं।
कला प्रेमियों, विशेषज्ञों और वरिष्ठ कलाकारों की मौजूदगी में युवा कलाकारों को न केवल अपनी कला दिखाने का मौका मिलेगा, बल्कि उन्हें मार्गदर्शन और प्रेरणा भी प्राप्त होगी।
मेले के दौरान कई कलाकार अपनी पेंटिंग्स और कलात्मक रचनाओं की प्रदर्शनी लगाएंगे, जिससे दर्शकों को राजस्थान की समृद्ध कला परंपरा और नई पीढ़ी की रचनात्मक सोच दोनों का अनुभव होगा।
पांच दिनों तक चलने वाले इस कला मेले में रोजाना अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में कला, साहित्य और संस्कृति की विविध विधाओं को शामिल किया गया है।
18 मार्च को मेले में कला शिविर, सिंधी भगत प्रस्तुति, फ्रैस्को कार्यशाला और कैलिग्राफी कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से कलाकारों को पारंपरिक और आधुनिक कला विधाओं के बारे में सीखने का अवसर मिलेगा।
19 मार्च को पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें युवा कलाकार अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करेंगे। इसी दिन फड़ वाचन का आयोजन भी किया जाएगा, जो राजस्थान की पारंपरिक कथा-वाचन शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके साथ ही पद्मश्री से सम्मानित कलाकार Ali Gani द्वारा मांड गायन की विशेष प्रस्तुति दी जाएगी, जो मेले का मुख्य आकर्षण मानी जा रही है।
20 मार्च को मेले के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित होगी। इसमें बाल नाट्य मंचन और कवि सम्मेलन शामिल हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवा कलाकारों को मंच पर अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
मेले का समापन 21 मार्च को शाम 6 बजे आयोजित समापन समारोह के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर कलाकारों और प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जा सकता है।
कला मेले के संयोजक हरशिव शर्मा ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य कलाकारों को ऐसा मंच प्रदान करना है जहां वे अपनी कला को बड़े स्तर पर प्रदर्शित कर सकें और समाज के विभिन्न वर्गों तक अपनी रचनात्मकता पहुंचा सकें।
वहीं अकादमी के सचिव डॉ. रजनीश हर्ष ने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश की कला और संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि कला मेला केवल कलाकारों के लिए ही नहीं बल्कि कला प्रेमियों के लिए भी एक विशेष अनुभव होता है।
इस बार मेले में प्रदेश के वरिष्ठ कलाकारों को भी शामिल किया गया है, जिससे युवा कलाकारों को उनके अनुभवों से सीखने और उनसे सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा।
जवाहर कला केन्द्र में आयोजित होने वाला यह मेला हर साल जयपुर के कला प्रेमियों के लिए एक विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है। यहां आने वाले लोग विभिन्न कलाकृतियों को देखने के साथ-साथ कलाकारों से सीधे बातचीत भी कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन युवा कलाकारों को प्रेरित करते हैं और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाते हैं।
जवाहर कला केन्द्र में आयोजित होने वाला ‘कला मेला’ केवल एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि कला, संस्कृति और रचनात्मकता का उत्सव है। पांच दिनों तक चलने वाला यह आयोजन युवा कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ जयपुर के कला प्रेमियों को भी विविध कलात्मक अनुभव प्रदान करेगा। 25वें संस्करण के रूप में आयोजित हो रहा यह मेला निश्चित रूप से राजस्थान की कला संस्कृति को नई पहचान देगा।
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