भारत और रूस: के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने वाली एक महत्वपूर्ण मुलाकात गुरुवार को नई दिल्ली में हुई। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
सर्गेई लावरोव इन दिनों भारत दौरे पर हैं और ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। उनकी प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई यह बैठक कई मायनों में बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि दुनिया इस समय यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
बैठक के दौरान यूक्रेन में जारी युद्ध और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर विशेष रूप से बातचीत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारत का वही रुख दोहराया, जिसमें उन्होंने संवाद और कूटनीति को किसी भी संघर्ष का सबसे बेहतर समाधान बताया।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी हल नहीं हो सकता और सभी पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
भारत लगातार यूक्रेन युद्ध को लेकर संतुलित नीति अपनाता रहा है। एक ओर भारत रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक संबंध बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर वह वैश्विक मंचों पर शांति और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, सर्गेई लावरोव ने प्रधानमंत्री मोदी को भारत और रूस के बीच जारी सहयोग की प्रगति की जानकारी दी।
बैठक में दिसंबर 2025 में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आए बदलाव और नई साझेदारियों पर भी चर्चा हुई। उस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में भारत और रूस लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं।
भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। रूस भारत को तेल और गैस का बड़ा आपूर्तिकर्ता बन चुका है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में भी लंबे समय से करीबी साझेदारी रही है।
माना जा रहा है कि बैठक के दौरान ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई होगी। हालांकि आधिकारिक बयान में इन मुद्दों का विस्तृत जिक्र नहीं किया गया।
सर्गेई लावरोव का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत ब्रिक्स देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
ब्रिक्स मंच पर भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों की भूमिका वैश्विक राजनीति में लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में लावरोव और मोदी की मुलाकात को केवल द्विपक्षीय बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्गेई लावरोव से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए अपनी शुभकामनाएं भेजीं।
यह संदेश भारत और रूस के बीच व्यक्तिगत नेतृत्व स्तर पर मजबूत रिश्तों का संकेत माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच कई बार हुई मुलाकातों ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई दी है।
यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की भूमिका पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। भारत लगातार खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश कर रहा है जो संवाद, संतुलन और शांति की नीति पर भरोसा करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आने वाले समय में वैश्विक संघर्षों को कम करने में मध्यस्थ की भूमिका भी निभा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मुलाकात ने भारत-रूस संबंधों की मजबूती और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों की साझा चिंता को फिर उजागर किया है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर हुई चर्चा आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकती है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.