राजस्थान में लगातार बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफे के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। कम संचालन खर्च, सरकारी सब्सिडी, रोड टैक्स में छूट और आसान संचालन जैसे कारणों से लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यही वजह है कि पिछले तीन वर्षों में राजस्थान में ई-वाहनों की संख्या करीब छह गुना बढ़कर 4.92 लाख से अधिक पहुंच गई है।
आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2023 में प्रदेश में ई-वाहनों की संख्या लगभग 1.75 लाख थी, जो अब तेजी से बढ़ते हुए 4.92 लाख के पार पहुंच चुकी है। अब केवल बड़े शहरों तक ही नहीं बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी ई-स्कूटर, ई-रिक्शा और ई-ऑटो आम होते जा रहे हैं।
राजस्थान में वर्तमान समय में लगभग 70 हजार से 80 हजार ई-रिक्शा और 6 हजार से 8 हजार ई-ऑटो संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में कुल 1.37 लाख ई-तिपहिया वाहन पंजीकृत हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ती मांग को दर्शाते हैं।
नागौर के ई-रिक्शा चालक सत्तार खान बताते हैं कि पहले डीजल वाहन चलाने में प्रतिदिन करीब 400 रुपए तक का खर्च आता था, लेकिन अब बिजली के माध्यम से पूरे दिन का खर्च लगभग 80 रुपए में पूरा हो जाता है। इससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 300 रुपए की बचत हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बढ़ती ईंधन कीमतों और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए ई-वाहनों की मांग और अधिक बढ़ सकती है। इससे न केवल लोगों की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम होगा बल्कि प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.