राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव पर बढ़ा दबाव, सरकार के सामने 31 जुलाई की बड़ी चुनौती

राजस्थान में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा 31 जुलाई 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश के बाद राज्य सरकार, निर्वाचन आयोग और प्रशासनिक अमले के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अदालत ने भले ही सरकार को अवमानना मामले में राहत दी हो, लेकिन तय समयसीमा ने चुनावी तैयारियों को लेकर प्रशासनिक दबाव काफी बढ़ा दिया है। राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव तैयारियों के लिए सरकार और आयोग के पास केवल 40 से 50 दिन का समय बचा है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में पंचायत और निकाय चुनाव की पूरी प्रक्रिया लगभग तीन महीने तक चलती है।

चुनाव कराने की दिशा में सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा व्यवस्था मानी जा रही है। राजस्थान निर्वाचन आयोग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार राज्यभर में शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए करीब 1.5 लाख पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की आवश्यकता होगी। जबकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य सरकार फिलहाल लगभग 80 हजार सुरक्षा कर्मी ही उपलब्ध करा सकती है। ऐसे में अतिरिक्त सुरक्षा बलों के लिए केंद्रीय एजेंसियों या अन्य राज्यों पर निर्भरता बढ़ सकती है, जिससे तैयारियों में अतिरिक्त समय लग सकता है।

इसके साथ ही परिसीमन, सीमांकन और मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 20 जून 2026 तक सभी ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार मतदाता सूची का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन नए सिरे से सत्यापन की प्रक्रिया अभी बाकी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में देरी के पीछे ओबीसी आरक्षण का मुद्दा भी एक प्रमुख कारण रहा है। राज्य सरकार का तर्क रहा है कि पर्याप्त आंकड़ों के अभाव में सीटों का सही आरक्षण तय करना संभव नहीं है। हाई कोर्ट ने ओबीसी आयोग को अपनी अंतरिम रिपोर्ट समय पर सरकार को सौंपने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आयोग समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता है, तो ओबीसी आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी मानकर चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

इधर राजनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रदेशभर में ग्राम विकास चौपाल और रात्रि विश्राम कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। इसके अलावा मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों को भी विभिन्न जिलों में सक्रिय रहने और कार्यकर्ताओं के बीच सरकार की योजनाओं का फीडबैक लेने के निर्देश दिए गए हैं। राजनीतिक जानकार इसे आगामी पंचायत चुनावों की रणनीतिक तैयारी के रूप में देख रहे हैं।

राजस्थान की राजनीति में पंचायत और निकाय चुनावों को हमेशा सत्ता की जमीनी पकड़ का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत और चुनावी गतिविधियां और अधिक तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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