- जयपुर। राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण और भू-जल संरक्षण के लिए नई कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत रीको और गैर-रीको औद्योगिक क्षेत्रों में सीईटीपी का निर्माण होगा और परियोजना पर 150 करोड़ रुपए तक अनुदान दिया जाएगा। नई योजनाओं में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक का उपयोग किया जाएगा जिससे ट्रीटेड पानी का पुन: उपयोग किया जा सके।
पुरानी सीईटीपी योजना का दायरा बढ़ाकर अनुदान सीमा 100 करोड़ रुपए कर दी गई है। रीको औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अनुदान राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा प्रदान किया जाएगा, जबकि गैर-रीको औद्योगिक क्षेत्रों में राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण मंडल स्तर पर सहायता उपलब्ध होगी।
अनुदान की प्रमुख शर्तें:
- परियोजना लागत का 80 प्रतिशत तक अनुदान
- अधिकतम 150 करोड़ रुपए की सहायता
- औद्योगिक इकाइयों को केवल 20 प्रतिशत खर्च स्वयं वहन करना होगा
मुख्य चुनौती क्षेत्र:
- पाली – टेक्सटाइल और डाइंग इकाइयों से रासायनिक पानी समस्या
- बालोतरा – डाइंग-प्रिंटिंग इकाइयों के रसायन भू-जल को प्रभावित
- भीलवाड़ा – बड़ी संख्या में टेक्सटाइल प्रोसेसिंग यूनिट
- जोधपुर – बासनी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में अपशिष्ट जल चुनौती
- जयपुर – इंजीनियरिंग, केमिकल और प्रोसेसिंग इकाइयां, सुरक्षित अपशिष्ट निस्तारण चुनौती
- अलवर-भिवाड़ी – ऑटोमोबाइल, केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर
यह योजना औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हुए पर्यावरण संरक्षण और भू-जल सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।