राजस्थान में विद्युत प्रसारण एवं वितरण तंत्र को मजबूत बनाने के प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से दिख रहा है। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली मांग के बावजूद प्रदेश में घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही विद्युत शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आई है।
राज्य सरकार 2027 तक किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। प्रदेश में विद्युत ढांचे का व्यापक विस्तार किया गया है। अब तक 33 केवी के 444 सब स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जबकि 211 पर कार्य जारी है। 400, 220 और 132 केवी क्षमता के 59 ग्रिड सब स्टेशन (GSS) स्थापित किए गए हैं और 145 निर्माणाधीन हैं।
सौर ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। कुसुम योजना, रूफटॉप और अन्य सौर परियोजनाओं के जरिए लगभग 7,376 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है, जबकि तापीय परियोजनाओं से 7,830 मेगावाट क्षमता उपलब्ध है। सरकार सौर, पवन, पंप स्टोरेज, गैस और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली पर विशेष फोकस कर रही है।
गर्मी में ट्रिपिंग और फॉल्ट कम करने के लिए 13,473 एमवीए क्षमता वृद्धि वाले ट्रांसफार्मर, 4,815 फीडरों का विभाजन, 5,000 नई सर्किट लाइनों का विस्तार और 3,682 GSS का रखरखाव किया गया।
उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए टोल फ्री कॉल सेंटर, ग्राहक सेवा केंद्र, केंद्रीय नियंत्रण कक्ष और 1,129 फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीमें लगातार सक्रिय हैं। 1 अप्रैल से 20 मई 2026 के दौरान जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम में नो-करंट शिकायतें घटकर 3,11,000 रह गईं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 3,52,000 थीं।
राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। 27 मई को रात 10:15 बजे इस गर्मी की सर्वाधिक 17,333 मेगावाट मांग दर्ज की गई, जिसे बिना कटौती पूरा किया गया। दिन में बिजली की उपलब्धता मांग से अधिक रही। रात में सोलर उत्पादन बंद होने पर एनर्जी एक्सचेंज से पूर्ति की जाती है।
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) के अभियंता रात 8 बजे से 11 बजे तक फील्ड में हैवी लोड वाले GSS, ट्रांसफार्मर और फीडरों की निगरानी कर रहे हैं। इससे लोड बैलेंसिंग बेहतर हुई है और ट्रिपिंग तथा वोल्टेज उतार-चढ़ाव जैसी समस्याओं में कमी आई है।
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