पश्चिम बंगाल: में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के बांकुड़ा के बिष्णुपुर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
मोदी ने आरोप लगाया कि TMC ने संसद में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को पारित होने से रोककर “बंगाल की बेटियों के साथ धोखा” किया है। उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाएं आगामी चुनावों में इसका जवाब जरूर देंगी।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि बंगाल की मौजूदा सरकार नहीं चाहती कि राज्य की बेटियां अधिक संख्या में संसद तक पहुंचें। उनके अनुसार, यही कारण है कि महिला आरक्षण कानून को पास नहीं होने दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में “कट मनी” और भ्रष्टाचार की संस्कृति ने विकास को बाधित किया है और आम लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक ही दिन में बिष्णुपुर, पुरुलिया, झाड़ग्राम और मेदिनीपुर में चुनावी रैलियां कीं। ये सभी क्षेत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माने जाते हैं, जहां पिछले चुनावों में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया था।
इन रैलियों के जरिए भाजपा ने आदिवासी और ग्रामीण वोटर्स को साधने की रणनीति अपनाई है।
प्रधानमंत्री के आरोपों पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन “देश को गुमराह करने वाला” था।
ममता ने लिखा कि यदि प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम संबोधन करना है, तो उन्हें संसद के माध्यम से करना चाहिए, न कि राजनीतिक मंच से।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महिलाओं को “ढाल” बनाकर परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा रही है, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी हमेशा महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के पक्ष में रही है। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा और राज्यसभा में TMC के महिला सांसदों का प्रतिशत देश में सबसे अधिक है।
उनके अनुसार, महिला आरक्षण का विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता, और यह आरोप पूरी तरह राजनीतिक है।
इस बीच, हिमंत बिस्वा सरमा ने भी बयान देते हुए दावा किया कि भाजपा पश्चिम बंगाल में “दोहरा शतक” लगाएगी। वहीं, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में भी चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है।
चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार पश्चिम बंगाल में करीब 7 लाख नए वोटर जोड़े गए हैं। मतदान को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पोलिंग स्टेशनों के आसपास 100 मीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र तय किया गया है।
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले महिला आरक्षण बिल एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरा है। जहां प्रधानमंत्री मोदी इसे महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर विपक्ष पर हमला कर रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी इसे राजनीतिक एजेंडा बता रही हैं। इस सियासी टकराव का असर चुनावी नतीजों पर कितना पड़ेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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