राजस्थान: की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने राज्य में हाल ही में हुई रिफाइनरी आग की घटना को लेकर बड़ा और गंभीर बयान दिया है। उन्होंने इस घटना को सामान्य हादसा मानने से साफ इनकार करते हुए इसे संभावित साजिश तक करार दिया है।
जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि “नई रिफाइनरी में इस तरह आग लगना सामान्य नहीं हो सकता। इसके पीछे या तो बड़ी लापरवाही है या फिर कोई तोड़फोड़ की साजिश।” उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
गहलोत ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशीलता से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi का दौरा प्रस्तावित होता है, तो उससे 2-3 दिन पहले ही SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) सुरक्षा व्यवस्था संभाल लेती है। ऐसे में इतनी बड़ी घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी सख्त सुरक्षा के बीच इस तरह की घटना कैसे हो गई? क्या कहीं सुरक्षा में चूक हुई या फिर किसी ने जानबूझकर इस घटना को अंजाम दिया?
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मामले पर विदेशी विशेषज्ञों से बात की है। उनके अनुसार, 20-25 साल पुरानी रिफाइनरी में इस तरह की घटनाएं कभी-कभी हो सकती हैं, लेकिन नई और आधुनिक रिफाइनरी में आग लगना बेहद असामान्य है।
गहलोत ने कहा कि इसके पीछे तीन संभावनाएं हो सकती हैं—पहली, तकनीकी चूक; दूसरी, जल्दबाजी में काम पूरा करने का दबाव; और तीसरी, किसी तरह की साजिश या सबोटाज। उन्होंने कहा कि “हमारे देश में कई बार प्रोजेक्ट को जल्दी पूरा करने के दबाव में सुरक्षा मानकों से समझौता कर लिया जाता है, जो खतरनाक साबित होता है।”
रिफाइनरी मामले के साथ-साथ गहलोत ने किसानों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं और सरकार को तुरंत कर्ज माफी का फैसला लेना चाहिए।
उन्होंने अपनी सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि “हमने किसानों का कर्ज माफ किया था और अब मौजूदा सरकार को भी उसी तरह कदम उठाना चाहिए।” गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ रहा है।
इसके अलावा गहलोत ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि “सरकार में हर स्तर पर भ्रष्टाचार हावी है। बिना पैसे के कोई काम नहीं हो रहा। अब तो गांवों तक भी भ्रष्टाचार पहुंच चुका है।”
महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। गहलोत ने कहा कि बीजेपी सरकार सिर्फ बातों में महिला सशक्तिकरण की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब तक महिला आयोग की अध्यक्ष की नियुक्ति तक नहीं हो पाई है।
उन्होंने शिक्षक भर्ती में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण की घोषणा का जिक्र करते हुए कहा कि इसका नोटिफिकेशन अब तक जारी नहीं हुआ है, जो सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गहलोत का यह बयान आने वाले समय में राज्य की राजनीति को और गर्म कर सकता है। रिफाइनरी जैसी बड़ी परियोजना पर उठे सवाल और साजिश की आशंका ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।
रिफाइनरी आग की घटना पर Ashok Gehlot के गंभीर आरोपों ने मामले को नई दिशा दे दी है। अब सभी की नजर जांच पर टिकी है कि यह महज हादसा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी है। साथ ही, किसानों और भ्रष्टाचार के मुद्दे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
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