राजस्थान: की राजधानी जयपुर में नगर निगम चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी की गई फाइनल सूची में करीब 1.26 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इस बदलाव ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल मचा दी है।
नई सूची के अनुसार अब जयपुर नगर निगम क्षेत्र में कुल 24 लाख 18 हजार 272 मतदाता ही अपने मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे। इससे पहले जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में यह संख्या 25 लाख 44 हजार 506 थी। यानी आपत्तियों और दावों के निस्तारण के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़ा अंतर आया है।
मतदाताओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें 12 लाख 56 हजार 325 पुरुष, 11 लाख 61 हजार 856 महिला और 91 ट्रांसजेंडर वोटर्स शामिल हैं। यह आंकड़ा बताता है कि महिला मतदाताओं की भागीदारी भी काफी मजबूत बनी हुई है।
सबसे ज्यादा चर्चा वार्डों में वोटर्स की असमान संख्या को लेकर हो रही है। नगर निगम के 150 वार्डों में कहीं 5 हजार से भी कम वोटर्स हैं, तो कहीं यह संख्या 30 हजार से ऊपर पहुंच गई है। सबसे कम मतदाता वार्ड संख्या 93 में दर्ज किए गए हैं, जहां केवल 4810 वोटर्स हैं। वहीं वार्ड संख्या 26 सबसे बड़ा वार्ड बनकर सामने आया है, जहां 30 हजार 103 मतदाता हैं।
यह असमानता चुनावी संतुलन पर बड़ा असर डाल सकती है। जिन वार्डों में वोटर्स कम हैं, वहां एक-एक वोट की अहमियत बढ़ जाएगी, जबकि ज्यादा मतदाता वाले वार्डों में चुनावी समीकरण पूरी तरह अलग होंगे।
जयपुर के 150 वार्डों में से 8 वार्ड ऐसे हैं, जहां मतदाताओं की संख्या 10 हजार से भी कम है। इनमें वार्ड संख्या 30, 31, 93, 102, 121, 131, 144 और 150 शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कम मतदाता संख्या स्थानीय जनसंख्या या पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियों की ओर इशारा करती है।
दूसरी तरफ 29 वार्ड ऐसे हैं, जहां 20 हजार से ज्यादा वोटर्स हैं। इनमें वार्ड संख्या 2, 4, 13, 17, 25, 26, 37 से 39, 49, 50, 58, 59, 62, 67, 69, 70, 90, 99, 101, 109, 113, 114, 133, 135, 136, 142, 143 और 147 शामिल हैं। इन वार्डों में चुनावी प्रतिस्पर्धा ज्यादा कड़ी रहने की संभावना है।
अब सवाल उठता है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम क्यों हटाए गए। निर्वाचन विभाग के अनुसार ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद मृत मतदाताओं, डुप्लीकेट एंट्री और दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हो चुके लोगों के नाम हटाए गए हैं। इस प्रक्रिया के बाद कुल 1 लाख 26 हजार 234 मतदाता सूची से बाहर हो गए।
नगर निगम चुनाव के लिहाज से यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव की तारीखों की घोषणा भले ही अभी बाकी हो, लेकिन यही फाइनल वोटर लिस्ट आगामी चुनाव का आधार बनेगी। ऐसे में राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति नए आंकड़ों के अनुसार तैयार करनी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि वार्डों में वोटर्स की असमानता भविष्य में परिसीमन की जरूरत को भी दर्शाती है। यदि संतुलन नहीं बनाया गया तो प्रतिनिधित्व में असमानता का मुद्दा और बड़ा हो सकता है।
जयपुर नगर निगम चुनाव से पहले जारी हुई नई वोटर लिस्ट ने कई अहम संकेत दिए हैं। एक तरफ 1.26 लाख वोटर्स का नाम हटना प्रशासनिक सफाई का हिस्सा माना जा रहा है, वहीं वार्डों में मतदाताओं की असमान संख्या चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है। आने वाले चुनावों में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
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