NH-52 पर ‘आग का गोला’ बनी HDFC कैश वैन, करोड़ों की नकदी जलने से पहले ऐसे बची

राजस्थान: के टोंक जिले में गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब नेशनल हाईवे-52 पर चल रही HDFC Bank की कैश वैन अचानक भीषण आग की चपेट में आ गई। कुछ ही मिनटों में गाड़ी धधकते हुए आग के गोले में तब्दील हो गई। इस वैन में करोड़ों रुपये की नकदी मौजूद थी, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए थे।

घटना निवाई क्षेत्र में हुई, जहां जयपुर से भीलवाड़ा जा रही कैश वैन अपने नियमित रूट पर थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वाहन में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे पहले धुआं उठा और देखते ही देखते आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया।

ड्राइवर की सूझबूझ से बची जानें

जैसे ही ड्राइवर को आग का अंदेशा हुआ, उसने तुरंत गाड़ी को सड़क किनारे रोक दिया। इस दौरान वाहन में मौजूद सुरक्षा गार्ड और स्टाफ घबरा गए, लेकिन समय रहते सभी को बाहर निकाल लिया गया।

आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ ही पलों में वैन पूरी तरह लपटों में घिर गई। हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और राहगीरों की भीड़ जमा हो गई।

पुलिस और हाईवे कर्मियों का साहसिक रेस्क्यू

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और हाईवे कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना देरी किए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सबसे पहले गार्ड्स और ड्राइवर को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद सबसे चुनौतीपूर्ण काम था—करोड़ों की नकदी को सुरक्षित बचाना।

आग की लपटों के बीच जोखिम उठाते हुए कर्मचारियों ने कैश बॉक्स को बाहर निकाला। उनकी तत्परता और बहादुरी की वजह से एक भी रुपया नुकसान नहीं हुआ।

कैश को दूसरे वाहन में किया गया शिफ्ट

घटना की जानकारी मिलते ही बैंक के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस की निगरानी में पूरी नकदी को दूसरे वाहन में शिफ्ट किया गया। बाद में इसे कड़ी सुरक्षा के बीच सुरक्षित रूप से बैंक शाखा तक पहुंचाया गया।

हालांकि, आग में कैश वैन पूरी तरह जलकर खाक हो गई, लेकिन राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।

शॉर्ट सर्किट बना हादसे की वजह

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वाहन में शॉर्ट सर्किट के कारण यह आग लगी। हालांकि पुलिस और तकनीकी टीम पूरे मामले की जांच कर रही है ताकि स्पष्ट कारण सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर कैश ट्रांसपोर्ट सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर नकदी ले जाने वाले वाहनों में फायर सेफ्टी सिस्टम और नियमित तकनीकी जांच बेहद जरूरी है।

यदि समय रहते ड्राइवर और कर्मचारियों ने सतर्कता नहीं दिखाई होती, तो यह हादसा बड़े नुकसान में बदल सकता था।


निष्कर्ष:

टोंक में हुआ यह हादसा भले ही बड़े नुकसान से बच गया, लेकिन इसने कैश ट्रांसपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की पोल जरूर खोल दी है। ड्राइवर और हाईवे कर्मियों की तत्परता से करोड़ों की नकदी और कई जिंदगियां बच गईं। अब जरूरत है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सुरक्षा मानकों को और सख्त किया जाए।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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