सिरोही जिले का छोटा सा उड़वारिया गांव आज फुटबॉल के जुनून के कारण राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में एक अलग पहचान बना चुका है। फीफा विश्वकप-2026 के रोमांच के बीच यह गांव अपने खेल कौशल और जुनून के चलते ‘मिनी ब्राजील’ के नाम से मशहूर हो रहा है। कभी संसाधनों की कमी से जूझने वाला यह गांव आज फुटबॉल प्रतिभाओं का मजबूत केंद्र बन चुका है।
इस बदलाव के पीछे राजकीय विद्यालय उड़वारिया के शारीरिक शिक्षक एवं फुटबॉल कोच रतन सिंह कुम्पावत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्ष 2003 में उनकी नियुक्ति के बाद उन्होंने विद्यार्थियों को फुटबॉल के प्रति प्रेरित किया और नियमित अभ्यास शुरू कराया। उनके प्रयासों का नतीजा यह रहा कि आज गांव के 150 से अधिक खिलाड़ी राज्य स्तर तक पहुंच चुके हैं, जबकि 4 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं।
वर्ष 2007-08 में तैयार की गई पहली स्कूल टीम ने ही जिला स्तरीय प्रतियोगिता में विजेता बनकर इस यात्रा की शुरुआत की। इसके बाद लगातार टीम ने जिला स्तर पर कई सफलताएं हासिल कीं। वर्ष 2017 में गांव के खिलाड़ियों ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेकर इतिहास रचा।
खिलाड़ी मुकेश चौधरी ने संतोष ट्रॉफी में राजस्थान टीम की कप्तानी करते हुए राज्य को 55 वर्षों बाद 2026 में सुपर-8 तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, जिससे पूरे प्रदेश में गर्व का माहौल बना।
गांव में जनसहयोग से एक आधुनिक फ्लड लाइट युक्त फुटबॉल ग्राउंड तैयार किया गया है, जहां खिलाड़ी रात में भी अभ्यास कर सकते हैं। खिलाड़ियों ने अपने कोच के सम्मान में 900 किलो वजनी पत्थर से फुटबॉल सर्किल बनाकर एक अनोखी गुरु दक्षिणा दी है, जो गांव की पहचान बन चुका है।
कोच रतन सिंह कुम्पावत का कहना है कि उनका सपना है कि उड़वारिया के खिलाड़ी भविष्य में भारतीय फुटबॉल टीम तक पहुंचें और देश का नाम रोशन करें।
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