जैसलमेर के जिला मुख्यालय स्थित जवाहिर चिकित्सालय का ट्रोमा वार्ड रात के समय भी पूरी तरह सक्रिय रहता है, जहां आपातकालीन स्थिति में मरीजों का लगातार आना जारी रहता है। शहर जब गहरी नींद में होता है, तब अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पूरी मुस्तैदी से मरीजों का इलाज करते हैं।
रात की ड्यूटी के दौरान अस्पताल में अलग-अलग प्रकार के मरीज पहुंचते हैं, जिनमें बुखार से पीड़ित बच्चे, सांस की तकलीफ वाले मरीज, लो बीपी और आवारा श्वान के काटने के मामले शामिल होते हैं। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक बिना देरी के प्राथमिक उपचार शुरू करते हैं और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों से भी संपर्क किया जाता है।
चिकित्सकों के साथ नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय और अन्य कर्मचारी भी पूरी तत्परता से अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं, जिससे आपातकालीन सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहती हैं। मरीजों की जांच, दवा उपलब्ध कराना, स्ट्रेचर सुविधा और भर्ती प्रक्रिया सभी कार्य रातभर जारी रहते हैं।
यह रिपोर्ट राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर चिकित्सकों के समर्पण और उनकी सेवा भावना को दर्शाती है, जो बिना छुट्टी और समय की परवाह किए मरीजों की जान बचाने में लगे रहते हैं।
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