राजस्थान की राजधानी जयपुर में विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू (डीएनटी) समाज की विभिन्न जातियों ने 10 प्रतिशत आरक्षण सहित 11 सूत्री मांगों को लेकर विद्याधर नगर स्थित जेडीए ग्राउंड में महापड़ाव आयोजित किया। इस आंदोलन में राजस्थान के अलावा पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए आरपार की लड़ाई का ऐलान किया। आंदोलन के दौरान डीएनटी संघर्ष समिति और राष्ट्रीय पशुपालक संघ के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। वार्ता विफल होने के बाद प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने लगे। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। इस दौरान पथराव की घटना भी हुई। हालात बेकाबू होने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 40 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। राष्ट्रीय पशुपालक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राइका ने कहा कि डीएनटी समाज पिछले दो वर्षों से 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। वहीं, डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा ने बताया कि पुलिस ने प्रतिनिधिमंडल की सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात भी करवाई थी और बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन इसके बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी अचानक उग्र हो गए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में डीएनटी समाज को 10 प्रतिशत आरक्षण, स्थायी आवास के लिए भूमि पट्टा, जातियों के नामों में मौजूद विसंगतियों को दूर करना तथा सामाजिक और आर्थिक अधिकारों की सुनिश्चित व्यवस्था शामिल है। समाज के प्रतिनिधियों का दावा है कि राजस्थान की लगभग 15 प्रतिशत आबादी डीएनटी समुदाय से जुड़ी है और प्रदेश में इनकी 53 जातियां हैं, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में केवल 32 जातियों को मान्यता प्राप्त है।
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