राजस्थान में पंचायत एवं स्थानीय निकाय चुनावों में लगातार हो रही देरी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चुनाव प्रक्रिया में हो रही सुस्ती पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने राज्य चुनाव आयुक्त और राजस्थान पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के सचिव को 16 जुलाई दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। दोनों अधिकारियों से अदालत यह जानना चाहती है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी क्यों नहीं हो सकी।
दरअसल, राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव कराने के लिए निर्धारित समय सीमा बढ़ाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा और अभिषेक सिंह देवंदा ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर बताया। अदालत ने उनके तर्कों से सहमति जताते हुए राज्य सरकार के रवैये पर सवाल खड़े किए।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बार-बार समय सीमा बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव तय समय पर होना आवश्यक है और प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर इसमें अनिश्चितकालीन देरी उचित नहीं है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित विभागों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में अदालत चुनाव प्रक्रिया को जल्द पूरा कराने के लिए सख्त निर्देश जारी कर सकती है। अब सभी की नजर 16 जुलाई की सुनवाई पर टिकी है, जहां अधिकारियों को देरी के कारणों का विस्तृत जवाब देना होगा।
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