बीकानेर: कभी शादियों और बारातों की शान माने जाने वाले पारंपरिक बैंड-बाजों का कारोबार अब गंभीर संकट से गुजर रहा है। बीकानेर में चातुर्मास के चलते मांग पहले से ही कम हो जाती है, वहीं तेजी से बढ़ते DJ कल्चर ने बैंड व्यवसाय से जुड़े हजारों कलाकारों और कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है।
बैंड संचालकों का कहना है कि पहले शादी समारोहों में बैंड की धुनों के बिना बारात अधूरी मानी जाती थी, लेकिन अब अधिकतर लोग DJ को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके कारण बैंड मालिकों की आमदनी लगातार घट रही है। हालात ऐसे हैं कि कई बैंड संचालकों को अपने कर्मचारियों का वेतन देना भी मुश्किल हो रहा है, जबकि कई कलाकार दूसरे रोजगार की तलाश में जुट गए हैं।
व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि बीकानेर में इस उद्योग से हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। सीजन कमजोर होने और DJ के बढ़ते चलन से इन परिवारों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो पारंपरिक बैंड संस्कृति धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर पहुंच सकती है। उन्होंने सरकार से इस पारंपरिक कला और इससे जुड़े कलाकारों के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएं और आर्थिक सहायता की मांग की है।
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