केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजस्थान के प्रमुख राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस और आरएलपी नेताओं ने इसे छात्रों के लंबे आंदोलन और लोकतांत्रिक दबाव का परिणाम बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यह लाखों विद्यार्थियों के संघर्ष की जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और पेपर लीक के खिलाफ उठी आवाज़ के आगे केंद्र सरकार को झुकना पड़ा। गहलोत ने कहा कि छात्रों की मांगों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया, लेकिन आखिरकार सरकार को जवाबदेही तय करनी पड़ी।कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि छात्रों और युवाओं की आवाज़ सुनी गई है। उन्होंने कहा कि यह जवाबदेही पहले ही तय हो जानी चाहिए थी। पायलट ने मांग की कि जिन छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है उन्हें न्याय मिले और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।वहीं, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने इसे मेहनतकश युवाओं की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग कर रही थी। बेनीवाल ने कहा कि देशभर के युवाओं की एकजुटता ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया और अब शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू किए जाने चाहिए।धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष लगातार इसे छात्रों के आंदोलन की सफलता बता रहा है। वहीं अब राजनीतिक बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या सरकार शिक्षा व्यवस्था में ऐसे सुधार करेगी, जिससे भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं पर पूरी तरह रोक लग सके।
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