Meta ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री के पोस्ट पर लगाई गई रोक एक तकनीकी/ऑपरेशनल गलती थी। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जाएगा।
इस मामले को लेकर संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने भी कड़ा रुख अपनाया। समिति ने Meta से जवाब तलब किया और रिपोर्टों के अनुसार CEO मार्क जुकरबर्ग से भी बिना शर्त माफी की मांग की गई। समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और भारत के डिजिटल कानूनों के पालन पर जोर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और डिजिटल नियमों के पालन को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
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