राष्ट्रीय पशुपालक संघ, डीएनटी संघर्ष समिति एवं मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को जेल भरो आंदोलन हुआ। हजारों आंदोलनकारियों ने सड़कों पर उतरकर एकजुटता का प्रदर्शन किया और 1 जुलाई को जयपुर में महापड़ाव का ऐलान किया। आक्रोश रैली जिला कलक्टर कार्यालय पहुंची, जहाँ सरकार की उदासीनता पर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया और प्रतिनिधि मंडल ने ज्ञापन सौंपा।
अध्यक्ष लालजी राईका ने बताया कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समाज की 11 सूत्रीय मांगों को पूरा कराना है। प्रमुख मांग डीएनटी समाज को अलग से 10% आरक्षण, 10% राजनीतिक भागीदारी, आवास के लिए पट्टे, जमीन की व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है। राजस्थान में डीएनटी समाज की जनसंख्या करीब 1.23 करोड़ (लगभग 15%) है।
सह-अध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया ने बताया कि पिछले दो वर्षों से आंदोलन निरंतर चल रहा है। सरकार ने वार्ता के लिए समय देने का वादा किया था, पर पांच महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सरकार ने 78 सक्रिय आंदोलनकारियों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए और 6 नेताओं को 18 दिन जेल में रखा।
राष्ट्रीय पशुपालक संघ के जिलाध्यक्ष दीपक रेबारी और सह-अध्यक्ष कालूराम योगी ने बताया कि अब केवल डीएनटी ही नहीं, बल्कि वंचित ओबीसी, एससी एवं एसटी भी इस आंदोलन में शामिल हैं। संस्थापक उपाध्यक्ष भीखू सिंह राईका ने “दोस्त प्लस” मॉडल तैयार किया है, जिसमें चार प्रमुख स्तंभ डीएनटी, वंचित ओबीसी, वंचित एससी और वंचित एसटी हैं, और अन्य प्रगतिशील समाजों को भी आमंत्रित किया गया है।
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