जैसलमेर में पाकिस्तान से आए शरणार्थियों की मुश्किलें, नागरिक सुविधाओं की कमी और नागरिकता का इंतजार

सीमावर्ती जैसलमेर जिले में पाकिस्तान से आए हजारों शरणार्थी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं। ये परिवार धार्मिक और सामाजिक प्रताड़नाओं से बचकर भारत आए थे और सुरक्षित जीवन की उम्मीद लेकर यहां बसे, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में शरणार्थी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं।

जैसलमेर के ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र स्थित शरणार्थी भील बस्ती में करीब 1500 से 2000 लोग रह रहे हैं। यहां रहने वाले परिवारों को बिजली, पेयजल, पक्की सड़क और नालियों जैसी मूलभूत सुविधाओं की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। बस्ती के कुछ हिस्सों में ही सीमित नागरिक सुविधाएं पहुंची हैं, जबकि पीछे बसे परिवार अब भी बुनियादी जरूरतों से वंचित हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, आबादी बढ़ने और परिवारों के विस्तार के कारण जमीन की कमी गंभीर समस्या बन गई है। कई परिवार शादी और परिवार बढ़ने के बाद बाहर जाकर अस्थायी रूप से बसते हैं, लेकिन बाद में उन्हें अतिक्रमण के नाम पर कार्रवाई और मकान टूटने का डर बना रहता है।

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में पेयजल की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ता है। कई हिस्सों में सड़क और साफ-सफाई की व्यवस्था भी नहीं है। इसके अलावा, लॉन्ग टर्म वीजा और नागरिकता संबंधी दस्तावेज न होने के कारण बच्चों के आधार कार्ड नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उन्हें स्कूलों में प्रवेश और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सीमांत लोक संगठन के अनुसार, जिले में अब तक लगभग 7000 से 8000 शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिल चुकी है, लेकिन अभी भी करीब 4000 लोग नागरिकता का इंतजार कर रहे हैं। नागरिकता न मिलने के कारण वे सरकारी योजनाओं और बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सीएए कानून लागू होने के बाद नागरिकता प्रक्रिया में तेजी आई है और अब यह कार्य 3 से 6 महीनों में पूरा किया जा रहा है, लेकिन कई परिवार अभी भी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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