निकाय चुनाव के बाद बीजेपी अब उन क्षेत्रों की भी समीक्षा कर रही है, जहां पार्टी को अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। खास तौर पर मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों में यह देखा जा रहा है कि संबंधित निकाय में पार्टी बोर्ड बनाने में सफल रही या नहीं और चुनावी प्रदर्शन कैसा रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम कुमार दक के बड़ीसादड़ी, हेमंत मीणा के प्रतापगढ़, ओटाराम देवासी के सिरोही, जोगेश्वर गर्ग के जालोर, विजय सिंह चौधरी के नावां, प्रेमचंद बैरवा के दूदू और मंजू बाघमार के जायल क्षेत्र में बीजेपी निकाय प्रमुख बनाने में सफल नहीं रही।
वहीं हीरालाल नागर के सांगोद, मदन दिलावर के रामगंज मंडी, संजय सिंह के अलवर, कन्हैया लाल चौधरी के मालपुरा, जवाहर सिंह बेढम के नगर, किरोड़ी लाल मीणा के सवाईमाधोपुर, केके विश्नोई के गुड़ामालानी, सुमित गोदारा के लूणकरणसर, अविनाश गहलोत के जैतारण, सुरेश रावत के पुष्कर, जोगाराम पटेल के जोधपुर, गजेंद्र सिंह खींवसर के जोधपुर और झाबर सिंह खर्रा के श्रीमाधोपुर में बीजेपी निकाय प्रमुख बनाने में सफल रही।
निकाय चुनाव के बाद अब बीजेपी की नजर आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियों पर भी है। पार्टी स्तर पर कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों, स्थानीय संगठन और चुनावी रणनीति की समीक्षा की जा रही है। अन्य रिपोर्टों में भी निकाय चुनाव के बाद बीजेपी की ओर से सभी विधानसभा क्षेत्रों के संगठनात्मक प्रदर्शन का ऑडिट किए जाने की बात सामने आई है।
मंत्रियों और विधायकों के क्षेत्रों में चुनावी प्रदर्शन की यह समीक्षा आने वाले समय में पार्टी के संगठनात्मक फैसलों और रणनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, किसी मंत्री के प्रदर्शन को लेकर अंतिम आकलन पार्टी की आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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