पंचायत चुनाव में ERCP और यमुना जल समझौता बना BJP का प्रमुख मुद्दा, विकास के नाम पर वोट मांगने की तैयारी

जयपुर। राजस्थान में पंचायत राज चुनावों के ऐलान के साथ ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनावी मैदान में भारतीय जनता पार्टी ने ERCP और यमुना जल समझौते को प्रमुख मुद्दे के तौर पर प्रचारित करना शुरू कर दिया है। पार्टी इन दोनों परियोजनाओं को पानी, सिंचाई और क्षेत्रीय विकास से जोड़कर जनता के बीच अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश कर रही है।

ERCP के दायरे में आने वाले पूर्वी राजस्थान के कई जिलों और यमुना जल समझौते से प्रभावित शेखावाटी क्षेत्र में इन योजनाओं का मुद्दा पंचायत चुनाव के स्थानीय विकास के नैरेटिव का हिस्सा बनाया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दोनों परियोजनाओं से जुड़े क्षेत्रों में करीब 69 हजार पंचायत पद प्रभावित होते हैं। इनमें लगभग 3,717 पंचायत समिति सदस्य, 57,846 ग्राम पंचायत वार्ड पंच, 692 जिला परिषद सदस्य, 206 पंचायत समिति प्रधान और करीब 6,380 सरपंच के पद शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि ERCP से जुड़े क्षेत्र का प्रभाव करीब 84 विधानसभा सीटों तक और यमुना जल समझौते का प्रभाव करीब 21 विधानसभा सीटों तक माना जा रहा है। ERCP के तहत पूर्वी राजस्थान के करीब 17 जिलों और यमुना जल समझौते के तहत चूरू, सीकर और झुंझुनूं जैसे जिलों को जोड़ा जा रहा है।

चुनावी मंचों से योजनाओं का प्रचार

बीजेपी की ओर से पंचायत राज से जुड़े कार्यक्रमों और चुनावी सभाओं में इन दोनों परियोजनाओं की उपलब्धियों को प्रमुखता से बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के भाषणों में भी पानी और सिंचाई से जुड़े इन मुद्दों को प्रमुख स्थान दिए जाने की बात सामने आई है।

बीजेपी के प्रचार में कहा जा रहा है कि सरकार ने राजस्थान के लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों को सुलझाने की दिशा में कदम उठाए हैं और जल इंफ्रास्ट्रक्चर को जमीन पर उतारा जा रहा है। पार्टी ERCP को पूर्वी राजस्थान में सिंचाई और पेयजल उपलब्धता से, जबकि यमुना जल समझौते को शेखावाटी क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही पानी की मांग से जोड़कर प्रचारित कर रही है।

विकास के मुद्दे पर पंचायत चुनाव लड़ने की रणनीति

बीजेपी की रणनीति इन योजनाओं को स्थानीय विकास के मुद्दे में बदलकर पंचायत चुनाव में जनता के बीच जाने की है। पार्टी के प्रचार में कांग्रेस सरकार पर पूर्व में केवल घोषणाएं और वादे करने का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि बीजेपी अपने कार्यकाल में पुराने जल मुद्दों पर हुए समझौतों और परियोजनाओं को उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।

इसके लिए प्रचार रथों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के जरिए ERCP और यमुना जल समझौते से जुड़ी जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। पार्टी की ओर से संबंधित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं को भी इन परियोजनाओं की उपलब्धियों को जनता के बीच प्रचारित करने पर जोर दिया जा रहा है।

अब देखना होगा कि पंचायत राज चुनाव में पानी और विकास से जुड़े ये मुद्दे स्थानीय मतदाताओं के बीच कितना प्रभाव पैदा करते हैं और बीजेपी की यह चुनावी रणनीति जमीन पर किस तरह दिखाई देती है।

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