सर्किट हाउस पहुंचने पर आईजी डॉ. प्रीति चंद्रा और जिला कलेक्टर कमर चौधरी ने मुख्य सचिव का स्वागत किया। इसके बाद मुख्य सचिव भरतपुर साइबर थाने पहुंचे, जहां थाना प्रभारी पुरुषोत्तम ने उन्हें साइबर अपराध की शिकायत, सुनवाई, जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने समझा कि 1930 पर शिकायत दर्ज होने के बाद सूचना किस तरह फील्ड स्तर की पुलिस तक पहुंचती है और पुलिस कितनी तेजी से कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि 1930 व्यवस्था शुरू होने के बाद पूरी प्रक्रिया का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि थाने स्तर पर अनुसंधान को और तेज किया जा सके।
उन्होंने बताया कि फास्ट इन्वेस्टिगेशन के लिए पुलिस को अतिरिक्त संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का फोकस शिकायत मिलने के बाद पुलिस की फील्ड में कार्रवाई की गति बढ़ाने पर है।
मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर फ्रॉड के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती ठगी की रकम को आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर होने से रोकना है। इसके लिए पुलिस और बैंकों के बीच समन्वय को मजबूत किया जा रहा है। स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी और बैंक अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं।
सरकार का लक्ष्य साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले नए बैंक खातों की जल्द पहचान कर उन्हें समय रहते फ्रीज करना है। भरतपुर में जिला कलेक्टर द्वारा हर महीने इसकी समीक्षा की जा रही है, ताकि बैंकिंग सिस्टम के साथ बेहतर तालमेल बना रहे और संदिग्ध खातों पर समय रहते कार्रवाई हो सके।
मुख्य सचिव ने बताया कि राजस्थान पुलिस द्वारा साइबर अपराध के खिलाफ ‘ऑपरेशन न्यू हंटर’ चलाया जा रहा है। इसके तहत साइबर अपराध के हॉटस्पॉट क्षेत्रों में बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने वाले नए बैंक खातों की पहचान कर उन्हें बंद या फ्रीज कराने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए आगे ट्रांसफर करते हैं। ऐसे में इन खातों की पहचान कर शुरुआती स्तर पर ही कार्रवाई करना पुलिस की प्राथमिकता है।
मुख्य सचिव ने बताया कि वे स्वयं दो-तीन बार 1930 कॉल सेंटर का दौरा कर चुके हैं। उनका उद्देश्य शिकायतों को फील्ड स्तर की पुलिस कार्रवाई से और प्रभावी ढंग से जोड़ना है। मुख्यमंत्री के ‘फास्टेस्ट पॉसिबल एक्शन’ और ‘जीरो टॉलरेंस’ के निर्देशों के तहत राजस्थान पुलिस ने 1930 कॉल सेंटर और R4C को ऑपरेशनलाइज किया है।
मुख्य सचिव ने कहा कि बदलते साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस की तकनीकी क्षमता को लगातार मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए साइबर कमांडोज को अतिरिक्त प्रशिक्षण देने के साथ फास्ट इन्वेस्टिगेशन के लिए साइबर थानों में डेडिकेटेड इंटरनेट लाइन जैसे आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान पुलिस द्वारा ई-एफआईआर, जीरो एफआईआर, R4C सेंटर और ऑनलाइन व्यवस्थाओं जैसे कई नवाचार किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि साइबर अपराध के पीड़ितों को जल्द राहत मिले और अपराधियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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