पार्टी के सह-प्रभारी आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पुलिस रात करीब 10 बजे दीपक बालियान को उनके घर से थाने ले गई थी। पार्टी के अनुसार, उन्हें शांतिभंग के आरोप में हिरासत में लिया गया और कुछ समय बाद छोड़ दिया गया।
परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मी रात में दो बार दीपक के घर पहुंचे थे। पहली बार रात करीब 8 बजे पुलिस आई। इस दौरान दीपक ने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो बनाया। कुछ देर बाद पुलिसकर्मी वहां से चले गए, लेकिन रात करीब 10 बजे दोबारा पहुंचे और उनसे वीडियो हटाने के लिए कहा।
परिवार का दावा है कि दीपक ने वीडियो हटाने से इनकार किया, जिसके बाद उन्हें जबरन हिरासत में ले लिया गया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद उन्हें घसीटा गया।
दीपक बालियान के परिवार के मुताबिक, जब उनके छोटे भाई अनिरुद्ध ने पुलिस की कार्रवाई का वीडियो बनाना शुरू किया, तो पुलिसकर्मियों ने उनके साथ भी मारपीट की। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पार्टी की ओर से साझा किए गए लाइव वीडियो में आशुतोष रांका वीडियो कॉल के जरिए पुलिसकर्मियों से सवाल करते नजर आए। उन्होंने पुलिस से कार्रवाई का आधार बताने और पुलिसकर्मियों की पहचान स्पष्ट करने को कहा।
वीडियो के दौरान रांका ने दीपक को गिरफ्तार करने की चुनौती देते हुए कहा कि इसके बाद थाने में क्या होता है, यह देखने वाली बात होगी। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी के अनुसार, प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे को लेकर किया जाना है।
पार्टी नेताओं का आरोप है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के लिए संगठन के सदस्यों पर दबाव बनाया जा रहा है। CJP ने कहा है कि वह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदर्शन करेगी और हिरासत की स्थिति का सामना करने के लिए भी तैयार है।
दीपक बालियान की हिरासत के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। फिलहाल, परिजनों और पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
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