सामने आए आंकड़ों के अनुसार, अनंत इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में जनरल कैटेगरी की 1 और मैनेजमेंट की 25 सीटें खाली हैं। वहीं, आर्या मेडिकल कॉलेज में जनरल कैटेगरी की 94 और मैनेजमेंट की 18 सीटें खाली बताई गई हैं। बलबीर सिंह तोमर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में जनरल कैटेगरी की 81 सीटें रिक्त हैं।
भारत विकास इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में जनरल कैटेगरी की 107 और मैनेजमेंट की 23 सीटें खाली हैं। डॉ. बीएस तोमर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में जनरल की 10 और मैनेजमेंट की 22 सीटें रिक्त हैं। डॉ. एसएस टांटिया मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर और गीतांजली इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में मैनेजमेंट कैटेगरी की 13-13 सीटें खाली बताई गई हैं।
इसके अलावा, उदयपुर के गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में मैनेजमेंट की 7 सीटें, JIET मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में जनरल की 114 और मैनेजमेंट की 37 सीटें खाली हैं। जेएनयू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में जनरल की 25 और मैनेजमेंट की 37 सीटें रिक्त हैं। पेसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में जनरल की 1 और मैनेजमेंट की 13 सीटें खाली हैं, जबकि प्रिंस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में जनरल की 16 और मैनेजमेंट की 12 सीटें रिक्त बताई गई हैं।
सुधा मेडिकल कॉलेज में जनरल की 128 और मैनेजमेंट की 29 सीटें, जबकि व्यास मेडिकल कॉलेज में जनरल की 112 और मैनेजमेंट की 22 सीटें खाली हैं।
कॉलेजों के सामने आर्थिक चुनौती
MBBS सीटें खाली रहने से निजी मेडिकल कॉलेजों की आय और वित्तीय प्रबंधन पर असर पड़ने की आशंका है। अनुमान के मुताबिक, इन खाली सीटों के कारण सालाना 200 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन फीस संरचना, सीटों की श्रेणी और अन्य वित्तीय पहलुओं के आधार पर किया जाना होगा। खाली सीटों की स्थिति ने राज्य में मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया और निजी मेडिकल शिक्षा की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोट: सीटों के आंकड़ों और संभावित आर्थिक नुकसान की आधिकारिक पुष्टि संबंधित काउंसलिंग प्राधिकरण एवं कॉलेजों के रिकॉर्ड से किया जाना उचित होगा।
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