धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसी कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। मां का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य माना जाता है। वे सिंह पर सवार रहती हैं और उनकी चार भुजाएं शक्ति, निर्भयता तथा धर्म की रक्षा का संदेश देती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसी कारण उनकी पूजा अधर्म, अन्याय और नकारात्मक शक्तियों पर विजय के प्रतीक के रूप में की जाती है। मां कात्यायनी का स्वरूप भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने, आत्मविश्वास बनाए रखने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
नवरात्रि के छठे दिन भक्त मां कात्यायनी को पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करते हैं। धार्मिक परंपराओं में देवी को शहद का भोग लगाने की भी मान्यता है। मां कात्यायनी का मंत्र है—
“ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।”
मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ मां की आराधना करने से मन को शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। मां कात्यायनी की उपासना को विवाह संबंधी मनोकामनाओं से भी जोड़ा जाता है।
मां कात्यायनी की महिमा हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, सत्य का साथ देने और अपने भीतर की शक्ति को पहचानने की प्रेरणा देती है। नवरात्रि का यह पावन अवसर श्रद्धा, भक्ति और आत्मविश्वास के साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश देता है।
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