राज्यपाल सोमवार को राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, जोबनेर में आयोजित ‘वेटरनरी मेडिसिन इन द डिजिटल एरा’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में पशुओं के स्वास्थ्य, रोग निदान और संरक्षण से जुड़े प्रयासों को नई दिशा दी जा सकती है।
राज्यपाल ने पशुपालकों के लिए संचालित मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना और सरस डेयरी के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को संतुलित आहार देना, उनके स्वास्थ्य की नियमित देखभाल करना और बेहतर नस्ल के संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में देशी पशुधन की महत्वपूर्ण विविधता मौजूद है। राठी और थारपारकर जैसी देशी गायों का संरक्षण पशुपालन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। पशुपालकों, वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों को मिलकर पशुधन की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि पशु अपनी पीड़ा और बीमारी को मनुष्यों की तरह शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते। इसलिए पशुओं में रोग की पहचान और समय पर उपचार करना पशु चिकित्सकों के लिए विशेष चुनौती है।
उन्होंने पशु चिकित्सकों से संवेदनशीलता के साथ कार्य करने और पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परंपरागत रोग निदान प्रणालियों के साथ आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का समन्वय पशुधन संरक्षण को अधिक प्रभावी बना सकता है।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में 35 करोड़ से अधिक पशुओं को 12 अंकों की विशिष्ट डिजिटल पहचान यानी ‘पशु आधार’ सुविधा दी जा रही है। यह पहचान पशुओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड और टीकाकरण संबंधी जानकारी को व्यवस्थित रखने में उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड और आधुनिक तकनीकों के बेहतर उपयोग से पशुओं की देखभाल, रोगों की पहचान और पशुधन प्रबंधन को मजबूत किया जा सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि दूध का उपयोग डेयरी उत्पादों और मिठाई निर्माण में बड़े पैमाने पर होता है। राजस्थान से मिठाइयों का निर्यात भी किया जाता है। इस क्षेत्र में छोटे किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर पशुपालकों का योगदान महत्वपूर्ण है। उनके हितों को ध्यान में रखते हुए प्रोत्साहन और सहयोग के प्रयास किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम से पहले राज्यपाल ने पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने संगोष्ठी के उद्देश्यों और आयोजन से संबंधित जानकारी साझा की।
राष्ट्रीय संगोष्ठी में पशु चिकित्सा के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक, आधुनिक उपचार पद्धतियों और पशुधन संरक्षण के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।
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