विद्यार्थियों ने सीखा बिजली का बिल कम करने का तरीका, अब घर और स्कूल में बचाएंगे ऊर्जा

जयपुर, 12 अगस्त। बिजली की बचत और ऊर्जा दक्षता को बच्चों की रोजमर्रा की आदत बनाने के उद्देश्य से अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (अजमेर डिस्कॉम) की ओर से अजमेर शहर के आदर्श विद्या निकेतन, मदार में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बिजली की खपत कम करने, ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने और विद्युत सुरक्षा के जरूरी उपायों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने केवल बिजली बचाने के बारे में जानकारी ही नहीं ली, बल्कि खुद 'मास्टर ट्रेनर' और 'एनर्जी ऑडिटर' बनकर विद्यालय के अलग-अलग कमरों का पावर ऑडिट भी किया।

विद्यार्थियों ने किया स्कूल का एनर्जी ऑडिट

कार्यक्रम के दौरान 15 विद्यार्थियों की तीन टीमों का गठन किया गया। प्रत्येक टीम को एनर्जी ऑडिट शीट दी गई। इसके बाद विद्यार्थियों ने विद्यालय के विभिन्न कक्षों में जाकर पंखे, लाइट, कूलर, अन्य विद्युत उपकरण, प्राकृतिक रोशनी और अनावश्यक बिजली की खपत जैसे बिंदुओं की जांच की।

विद्यार्थियों ने ग्रीन पेन से ऑडिट शीट पर बिजली की खपत से जुड़ी कमियों को दर्ज किया और यह भी चिन्हित किया कि किन स्थानों पर छोटे-छोटे बदलाव करके बिजली की खपत कम की जा सकती है। ऑडिट के बाद विद्यार्थियों ने ऊर्जा बचत को लेकर अपने सुझाव भी दिए।

अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाया कि एनर्जी ऑडिट का उद्देश्य सिर्फ कमियां निकालना नहीं, बल्कि बिजली की खपत को समझकर उसे कम करने के व्यावहारिक उपाय तलाशना है। ऑडिट में शामिल विद्यार्थी अब स्कूल के दूसरे बच्चों को भी ऊर्जा बचत के तरीके बताएंगे।

'गेस द बिल' से समझा बिजली के बिल का गणित

कार्यक्रम में 'गेस द बिल' गतिविधि विद्यार्थियों के लिए खास आकर्षण रही। ऊर्जा प्रबंधक पी.सी. तिवारी ने बच्चों को विद्यालय के बिजली बिल की गणना समझाई। उन्होंने बताया कि पंखे, लाइट, कूलर, एसी और अन्य विद्युत उपकरण कितनी बिजली खपत करते हैं और इनके इस्तेमाल के आधार पर बिजली का बिल किस तरह बढ़ता है।

विद्यार्थियों से यह सवाल भी किया गया कि विद्यालय का बिजली बिल करीब 7 हजार से 10 हजार रुपये तक क्यों पहुंचता है। इसके जरिए बच्चों को उपकरणों की संख्या, उनके इस्तेमाल के घंटे और बिजली की खपत के बीच संबंध को आसान तरीके से समझाया गया।

इस गतिविधि से विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिली कि बिजली के उपकरणों का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल और अनावश्यक खपत पर नियंत्रण करके बिजली के बिल में कमी लाई जा सकती है।

बिजली बचत के साथ सुरक्षा की भी जानकारी

कार्यक्रम में अधिशासी अभियंता मोहन सिंह ने विद्यार्थियों को विद्युत सुरक्षा के महत्वपूर्ण नियम बताए। उन्होंने कहा कि गीले हाथों से बिजली के उपकरणों को नहीं छूना चाहिए। क्षतिग्रस्त तारों, खुले कनेक्शन और असुरक्षित विद्युत उपकरणों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

वहीं, कनिष्ठ अभियंता पारुल शाक्य ने विद्यार्थियों को ऊर्जा बचत और सुरक्षित तरीके से बिजली के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी।

हादसे से पहले सावधानी जरूरी

अजमेर डिस्कॉम के जनसंपर्क अधिकारी सतीश सोनी ने कहा कि विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव के लिए हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही सावधानी और जागरूकता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि शॉर्ट सर्किट, ओवरलोडिंग, खराब वायरिंग और असुरक्षित विद्युत उपकरण दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण बन सकते हैं। ऐसे में नियमित जांच और सुरक्षित विद्युत व्यवहार अपनाकर हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

स्कूल में ऊर्जा बचत के 'मास्टर ट्रेनर' बनेंगे विद्यार्थी

विद्यालय प्रबंधन ने अजमेर डिस्कॉम की इस पहल की सराहना की। कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को बिजली बचत का सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं दिया गया, बल्कि उन्हें वास्तविक रूप से ऊर्जा ऑडिट करने और बिजली के बिल को समझने का अनुभव भी मिला।

अब कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थी विद्यालय के अन्य छात्रों और अपने परिवारों को भी ऊर्जा बचत, बिजली के सही इस्तेमाल और विद्युत सुरक्षा के प्रति जागरूक करेंगे। इस तरह स्कूल से शुरू हुई यह पहल घरों तक ऊर्जा बचत का संदेश पहुंचाने में मदद करेगी।

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