राजस्थान ने रचा नया कीर्तिमान, अक्षय ऊर्जा क्षमता 50 हजार मेगावाट के पार

जयपुर, 12 अगस्त। राजस्थान ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य की कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता 50 हजार मेगावाट से अधिक पहुंच गई है। गुजरात के बाद राजस्थान देश का दूसरा राज्य बन गया है, जिसने 50 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का स्तर पार किया है।

राज्य सरकार की अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों और निवेशकों को प्रोत्साहन देने के परिणामस्वरूप राजस्थान ने यह उपलब्धि हासिल की है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के अनुसार, राजस्थान 44,135 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता के साथ देश में पहले स्थान पर है और भारत की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में करीब 27 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।

2030 तक 125 गीगावाट का लक्ष्य

राजस्थान सरकार ने एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 लागू की है। इसके तहत वर्ष 2030 तक राज्य में 125 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं के साथ ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

पिछले करीब ढाई वर्षों में राजस्थान ने 26,552 मेगावाट नई अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है। इसमें 25 हजार मेगावाट से अधिक योगदान सौर ऊर्जा का है।

विकेन्द्रित सौर ऊर्जा में भी राजस्थान आगे

राजस्थान में बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों के साथ-साथ विकेन्द्रित सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पीएम कुसुम योजना के कंपोनेंट-ए और सी के तहत प्रदेश में करीब 5 हजार मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इससे किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने के राज्य सरकार के प्रयासों को मजबूती मिली है।

वहीं, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 2 लाख 90 हजार से अधिक रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए हैं। इनके माध्यम से 3 लाख से अधिक परिवार सौर ऊर्जा से जुड़े हैं और करीब 1,128 मेगावाट क्षमता विकसित हुई है।

बैटरी ऊर्जा भंडारण पर भी जोर

राजस्थान अब अक्षय ऊर्जा के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्पादन निगम और अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा 12,400 मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता वाली परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

इसके अलावा डिस्कॉम्स द्वारा पायलट आधार पर 172 मेगावाट/688 ऑवर बैटरी भंडारण क्षमता विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत यूएलए मॉडल के माध्यम से 3 लाख घरों को रूफटॉप सौर ऊर्जा से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

राजस्थान में सौर ऊर्जा क्षमता सर्वाधिक

राज्य में वर्तमान में विभिन्न अक्षय ऊर्जा स्रोतों से कुल क्षमता में सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा योगदान है। राजस्थान में 44,135 मेगावाट सौर ऊर्जा, 5,541 मेगावाट पवन ऊर्जा, 223 मेगावाट बायोमास एवं वेस्ट-टू-एनर्जी तथा 436 मेगावाट हाइडल ऊर्जा की क्षमता स्थापित है।

विशाल भूमि, भरपूर सौर संसाधन, मजबूत ऊर्जा अवसंरचना और निवेश के अनुकूल वातावरण के चलते राजस्थान देश के एनर्जी ट्रांजिशन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। 50 हजार मेगावाट से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता की उपलब्धि राज्य की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा और दीर्घकालिक ऊर्जा नीति की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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