मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में RGHS की दवा वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग के अनुसार, लंबे समय से दवा उपलब्ध नहीं कराने वाली फार्मेसियों को पहले अपना स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया गया था। असंतोषजनक जवाब मिलने अथवा कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं देने पर संबंधित फार्मेसियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि लाभार्थियों को दवा प्राप्त करने में हो रही परेशानी को देखते हुए फार्मेसियों में अनुशासन स्थापित करने और RGHS के दिशा-निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए TMS को अस्थायी रूप से बंद किया गया है।
जिलेवार कार्रवाई में अलवर और सीकर में 20-20, भरतपुर, चूरू और दौसा में 10-10 तथा अजमेर में 9 फार्मेसियों का TMS बंद किया गया है।
इसके अलावा झुंझुनूं और श्रीगंगानगर में 8-8, जोधपुर और कोटा में 7-7, हनुमानगढ़ और पाली में 6-6, बारां और कोटपूतली-बहरोड़ में 5-5 फार्मेसियों पर कार्रवाई हुई है।
वहीं डीग, खैरथल-तिजारा और टोंक में 4-4, डीडवाना-कुचामन, नागौर और उदयपुर में 3-3 तथा ब्यावर, भीलवाड़ा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, धौलपुर, जैसलमेर, जालोर और करौली में 2-2 फार्मेसियों का TMS अस्थायी रूप से बंद किया गया है।
बालोतरा, बाड़मेर, बीकानेर, झालावाड़, सवाई माधोपुर और सिरोही में भी एक-एक फार्मेसी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। राजस्थान के बाहर दिल्ली और गुरुग्राम में भी एक-एक फार्मेसी पर कार्रवाई हुई है।
RGHS परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने बताया कि योजना का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को आवश्यक दवाइयां समय पर और सुचारु रूप से उपलब्ध कराना है। दवा वितरण में लापरवाही या अनावश्यक देरी को गंभीरता से लिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि संबंधित फार्मेसियों से प्राप्त स्पष्टीकरण और उपलब्ध अभिलेखों की जांच की जाएगी। जांच के आधार पर नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की इस कार्रवाई से उन निजी फार्मेसियों पर शिकंजा कसने का संदेश गया है, जो RGHS के तहत निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रही हैं। विभाग का कहना है कि लाभार्थियों को दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था को प्रभावी और सुचारु बनाए रखने के लिए निगरानी एवं कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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