राज्य में जल स्थिति का आकलन करें तो वर्तमान में 14 बांध पूरी तरह भरे हुए हैं, जबकि 452 बांध आंशिक रूप से भरे हैं। वहीं 227 बांध पूरी तरह सूख चुके हैं, जो आने वाले समय में जल संकट की आशंका को बढ़ाते हैं।
प्रदेश में जयपुर जोन के बांधों में सबसे ज्यादा पानी दर्ज किया गया है, जहां कुल क्षमता का 60.55 प्रतिशत जल उपलब्ध है। इसके बाद:
कोटा जोन – 59.44%
बांसवाड़ा जोन – 50.15%
उदयपुर जोन – 45.12%
भरतपुर जोन – 30.99%
जोधपुर जोन – 28.28% (सबसे कम)
15 फरवरी से 31 मार्च के बीच जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई। इस अवधि में:
कोटा जोन में सबसे ज्यादा 14.84% गिरावट
बांसवाड़ा जोन में 13.14% गिरावट
उदयपुर जोन – 9.25%
जोधपुर जोन – 8.35%
जयपुर जोन – 7.89%
भरतपुर जोन – 6.87% (सबसे कम गिरावट)
बढ़ सकती है चिंता
जल विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आगामी महीनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई और जल प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो राज्य के कई हिस्सों में पेयजल और सिंचाई संकट गहरा सकता है। विशेष रूप से जोधपुर और भरतपुर जोन में स्थिति पहले से ही गंभीर बनी हुई है।
कुल मिलाकर, वर्तमान आंकड़े संकेत देते हैं कि राजस्थान को आने वाले समय में जल संरक्षण और प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
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